गाजियाबाद/लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं में बढ़ती मोबाइल की लत को ‘गंभीर सामाजिक संकट’ मानते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। गाजियाबाद में मोबाइल गेमिंग की लत के चलते तीन सगी बहनों द्वारा की गई आत्महत्या की हृदयविदारक घटना के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को सख्त आदेश जारी किए हैं।
🚫 कक्षा 5 तक डिजिटल होमवर्क पर रोक
आयोग ने स्कूलों की वर्तमान कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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व्हाट्सएप होमवर्क बंद: कक्षा 5 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अब व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यमों से होमवर्क और असाइनमेंट भेजने पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
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परिसर में ही पूरा हो काम: शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी असाइनमेंट और शिक्षण कार्य स्कूल परिसर के भीतर ही पूर्ण कराए जाएं।
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मोबाइल निर्भरता कम करना: आयोग का मानना है कि पढ़ाई के बहाने बच्चे मोबाइल के आदी हो रहे हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
💔 गाजियाबाद की घटना ने झकझोरा
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने अपने पत्र में गाजियाबाद की घटना का जिक्र करते हुए कहा:
“गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या का कारण मोबाइल गेमिंग की लत और पिता का विरोध था। यह घटना समाज और हमारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। मोबाइल की अनियंत्रित लत पारिवारिक रिश्तों को खत्म कर रही है।”
🛡️ ‘डिजिटल अनुशासन’ की जरूरत
महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्कूलों और अभिभावकों को ‘डिजिटल अनुशासन’ अपनाने पर जोर दिया है:
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कार्यशैली में बदलाव: लॉकडाउन खत्म होने के बावजूद डिजिटल होमवर्क जारी रखना गलत है। स्कूलों को पुरानी पारंपरिक शिक्षण पद्धति पर लौटना होगा।
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मानसिक स्वास्थ्य: कम उम्र में मोबाइल का अधिक उपयोग बच्चों को व्यावहारिक और मानसिक रूप से बीमार बना रहा है।
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स्वस्थ वातावरण: बच्चों को मोबाइल की निर्भरता से मुक्त कर एक स्वस्थ सामाजिक और खेलकूद का वातावरण देना अनिवार्य है।
📋 जिलाधिकारियों को निर्देश
प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके जिलों में स्कूल इन आदेशों का कड़ाई से पालन करें। विषम परिस्थितियों को छोड़कर, किसी भी छोटे बच्चे को डिजिटल कार्य के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
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