देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील पर उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का निर्णय लिया है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड में बढ़ते वाहनों का दबाव अब चिंता का विषय बन गया है, जिसे देखते हुए इस पहल को वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
35 लाख से ज्यादा वाहनों का दबाव और बढ़ता प्रदूषण
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में पंजीकृत वाहनों की संख्या 35 लाख को पार कर गई है, जिनमें लगभग 20 लाख दोपहिया और 6 लाख कारें शामिल हैं। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम और गिरती वायु गुणवत्ता अब आम समस्या बन चुकी है। पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों की यह संख्या और बढ़ जाती है, जिससे पहाड़ों के संवेदनशील वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ईंधन की बचत और स्वास्थ्य लाभ
पर्यावरणविद् एवं वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा का मानना है कि यदि यह पहल प्रभावी रूप से लागू होती है, तो हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। वहीं, हरिद्वार के डॉ. केके त्रिपाठी के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण बच्चों और बुजुर्गों में सांस, एलर्जी और हृदय रोगों का खतरा बढ़ रहा है। ‘नो व्हीकल डे’ से लोगों को स्वच्छ हवा मिलेगी, जो स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
सार्वजनिक परिवहन और जनभागीदारी है जरूरी
विशेषज्ञ जय सिंह रावत का कहना है कि इस पहल की सफलता के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल को मजबूत करना, इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देना और साइकिल ट्रैक जैसी सुविधाएं बढ़ाना अनिवार्य है। यह अभियान केवल सरकारी आदेश तक सीमित न रहे, इसके लिए जनता की सक्रिय भागीदारी, कार पूलिंग और छोटी दूरी के लिए पैदल चलने की आदत विकसित करना जरूरी है। यदि आज लोग जागरूक नहीं हुए, तो आने वाले समय में पहाड़ों की शुद्ध हवा भी प्रदूषण की भेंट चढ़ सकती है।
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