किच्छा (ऊधम सिंह नगर): ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (ISD) की टीम ने किच्छा के एक गांव में समय रहते हस्तक्षेप कर एक नाबालिग बालिका का विवाह रुकवा दिया है। पुलिस की सहायता से की गई इस कार्रवाई में न केवल विवाह को रोका गया, बल्कि परिजनों को कानून का पाठ भी पढ़ाया गया।
सूचना के बाद एक सप्ताह तक चली जांच
संस्था को एक सप्ताह पूर्व सूचना मिली थी कि गांव के एक व्यक्ति द्वारा अपनी दो बेटियों का विवाह 28 अप्रैल को तय किया गया है, जिनमें से एक के नाबालिग होने की आशंका थी। डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने जब आयु संबंधी दस्तावेज मांगे, तो परिवार द्वारा टालमटोल की गई। विद्यालय और ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर जब टीम ने शादी का कार्ड प्राप्त किया, तो पुष्टि हुई कि दोनों बहनों का विवाह एक ही दिन होना है।
बारात पहुँचने पर पुलिस के साथ दी दबिश
हालांकि, शुरुआत में परिवार ने नाबालिग की शादी से इनकार किया था, लेकिन 28 अप्रैल को जब गांव में दो बारातें पहुँचने की खबर मिली, तो परियोजना निदेशक बिंदुवासिनी ने 112 पुलिस टीम के साथ मौके पर धावा बोल दिया।
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उम्र का खुलासा: जांच के दौरान आधार कार्ड में बालिका की आयु 17 वर्ष 1 माह पाई गई, जबकि दूल्हे की उम्र 30 वर्ष थी।
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शादी पर रोक: उम्र की पुष्टि होते ही टीम ने तुरंत विवाह रुकवा दिया और बारात को बैरंग वापस भेज दिया गया।
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शपथ पत्र: बालिका के माता-पिता से शपथ पत्र लिया गया कि वे बेटी की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही उसका विवाह करेंगे।
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी
परियोजना निदेशक बिंदुवासिनी ने बताया कि बड़ी बेटी के बालिग होने के कारण उसके विवाह की अनुमति दे दी गई थी। वहीं, नाबालिग बालिका को गुरुवार को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया है, जहाँ से अब आगे की कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
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