
लालकुआं/बिंदुखत्ता: जूडो फेडरेशन ऑफ इंडिया (JFI) के तत्वावधान में चंडीगढ़ के सेक्टर-23 स्थित टेबल टेनिस हॉल में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट जूडो प्रतियोगिता से उत्तराखंड के लिए एक गौरवशाली खबर सामने आई है। यहाँ बिंदुखत्ता क्षेत्र के घोड़ानाला निवासी भुवन जोशी की प्रतिभावान पुत्री भावना जोशी ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे बिंदुखत्ता और लालकुआं क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।
साई स्पोर्ट्स कॉलेज भोपाल में ले रही हैं ट्रेनिंग; परिजनों में खुशी का माहौल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भावना जोशी वर्तमान में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के स्पोर्ट्स कॉलेज, भोपाल (मध्य प्रदेश) में जूडो का कड़ा विधिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
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कड़ी मेहनत का फल: 10 से 13 जून 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश भर के शीर्ष खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिन्हें कड़े मुकाबलों में शिकस्त देकर भावना ने पॉडियम पर अपनी जगह पक्की की।
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परिजनों ने दी बधाई: भावना की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर उनके माता-पिता, स्थानीय खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है। परिजनों ने इसे भावना की कड़ी मेहनत, अटूट अनुशासन और खेल के प्रति उनके विधिक समर्पण का प्रतिफल बताया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच का रास्ता साफ; जॉर्डन में खेलेंगी एशियाई चैंपियनशिप
राष्ट्रीय प्रतियोगिता के मंच पर ब्रॉन्ज मेडल जीतने के साथ ही भावना जोशी के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के विधिक द्वार खुल गए हैं।
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एशियाई कैडेट जूडो चैंपियनशिप-2026: राष्ट्रीय स्तर पर पदक तालिका में जगह बनाने के बाद अब भावना को आगामी एशियाई कैडेट जूडो चैंपियनशिप-2026 में भारतीय टीम की ओर से खेलने का विधिक अवसर मिल सकता है।
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जॉर्डन में होगा मुकाबला: खेल विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आगामी 15 से 17 जुलाई 2026 तक अम्मान (जॉर्डन) में आयोजित होने जा रही है।
स्थानीय खेल विश्लेषकों का मानना है कि भावना को यदि इसी प्रकार का विधिक मार्गदर्शन और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलती रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब वह ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन करेंगी।
कांस्य पदक जीतने वाली भावना जोशी ने अपनी इस शानदार सफलता का पूरा श्रेय अपने कोच दिनेश कुमार को दिया है। भावना का मानना है कि उनकी जूडो यात्रा के शुरुआती दिनों में दिनेश कुमार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के बिना इस मुकाम तक पहुंचना असंभव था।
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