देहरादून: साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के राष्ट्रीय संकल्प के क्रम में उत्तराखंड सरकार ने राज्य की बुनियादी विकास परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘प्रगति पोर्टल’ के माध्यम से राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की गहन विधिक समीक्षा की। इस बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण (PWD), राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), सीमा सड़क संगठन (BRO) और अन्य महत्वपूर्ण विभागों की ₹6,940 करोड़ की कुल 12 बड़ी परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति का लेखा-जोखा लिया गया।
लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही; 15 अक्टूबर 2026 तक काम पूरे करने के विधिक निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यप्रणाली में लेती-लतीफी को लेकर अधिकारियों को बेहद सख्त विधिक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में होने वाली देरी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में सीएम द्वारा निम्नलिखित मुख्य दिशा-निर्देश जारी किए गए:
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डेडलाइन तय: जिन विकास परियोजनाओं पर अब तक 50 फीसदी तक का कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में शत-प्रतिशत पूर्ण करने के विधिक निर्देश दिए गए हैं।
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समीक्षा का त्रिस्तरीय ढांचा: कार्यों में तेजी लाने के लिए अब मुख्यमंत्री स्तर पर प्रति माह, जबकि मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिनों में इन परियोजनाओं की नियमित विधिक समीक्षा की जाएगी।
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दंडात्मक कार्रवाई: यदि किसी परियोजना में अनावश्यक देरी पाई जाती है, तो संबंधित विभागाध्यक्ष और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कठोर दंडात्मक व विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
चारधाम सड़क और सीमांत कनेक्टिविटी सहित इन प्रमुख परियोजनाओं की हुई समीक्षा
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राज्य के आर्थिक और सामरिक विधिक महत्व से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की धरातलीय प्रगति को परखा गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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परिवहन क्षेत्र: रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, तथा ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला का निर्माण कार्य।
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ऊर्जा क्षेत्र: बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र (सब-स्टेशन) परियोजनाएं।
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सड़क एवं सामरिक कनेक्टिविटी: ऑल वेदर चारधाम सड़क परियोजनाएं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना सहित हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) परियोजनाएं।
वन भूमि हस्तांतरण और मुआवजे के लंबित मामलों की खुद मॉनिटरिंग करेंगे डीएम
परियोजनाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री ने प्रगति पोर्टल को एक प्रभावी विधिक निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां (Forest Clearance), भूमि अधिग्रहण और क्षतिपूर्ति (मुआवजा) वितरण जैसे प्रशासनिक कारणों से जहां भी काम रुका है, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय से त्वरित विधिक समाधान निकालें।
सीएम धामी ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को विधिक आदेश जारी किए हैं कि वे जिला स्तर पर लंबित ऐसे सभी मामलों की स्वयं व्यक्तिगत रूप से निगरानी (पर्सनल मॉनिटरिंग) करें। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा:
“परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब से न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनहित एवं आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। चारधाम यात्रा और सीमांत क्षेत्रों की ये सामरिक परियोजनाएं राज्य के समग्र विकास, पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए इनका समय पर पूरा होना अनिवार्य है।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
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