देहरादून/हरिद्वार: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संविधान के प्रति निष्ठा और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया। उन्होंने राज्य की प्रगति के लिए ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को दोहराया।
🚀 ’21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का’
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को याद दिलाते हुए कहा:
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बाबा केदार का उद्घोष: पीएम मोदी ने केदारनाथ की पावन भूमि से कहा था कि यह दशक उत्तराखंड का होगा। यह कथन हमारे लिए केवल शब्द नहीं, बल्कि राज्य के विकास का रोडमैप है।
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आंदोलनकारियों को नमन: उन्होंने राज्य स्थापना के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि आज हम जो अलग राज्य का आनंद ले रहे हैं, वह आंदोलनकारियों की तपस्या और बलिदान का परिणाम है।
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लक्ष्य: हमारा एकमात्र उद्देश्य उत्तराखंड को हिंदुस्तान का ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाना है। इसके लिए उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
🚩 तीर्थों की मर्यादा: गैर-हिंदू प्रवेश प्रतिबंध पर स्पष्टीकरण
हरिद्वार के गंगा घाटों और अन्य धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बयान दिया:
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धार्मिक संगठनों की भूमिका: सीएम ने कहा कि गंगा सभा, तीर्थ सभा, केदार सभा और बीकेटीसी जैसे संगठन सदियों से हमारे मंदिरों और घाटों का प्रबंधन कर रहे हैं।
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राय को प्राथमिकता: सरकार इन धार्मिक संस्थाओं और तीर्थ पुरोहितों की राय और विचारों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
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कानूनी अध्ययन: उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय से जुड़े पुराने कानूनों और नियमों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद ही कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य सनातन धर्म की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना है।
🤝 समावेशी विकास का मंत्र
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के मूल मंत्रों को जीवन में उतारने की अपील की:
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सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास: इन सिद्धांतों को अपनाकर ही हम समावेशी प्रगति सुनिश्चित कर सकते हैं।
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संवैधानिक मर्यादा: उन्होंने सभी नागरिकों से न्याय के मार्ग पर चलने और संविधान का सम्मान करने का अनुरोध किया।
📋 संक्षिप्त सारांश: मुख्यमंत्री के संबोधन की 3 बड़ी बातें
| विषय | मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण |
| राज्य का भविष्य | उत्तराखंड को देश का नंबर-1 राज्य बनाने का संकल्प। |
| धार्मिक मुद्दे | तीर्थ पुरोहितों की राय और कानूनों के अध्ययन के आधार पर फैसला। |
| नागरिक कर्तव्य | संविधान का सम्मान और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी। |
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