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CM धामी का चंपावत और खटीमा दौरा: ₹182 करोड़ की योजनाओं की सौगात और उत्तरायणी का उत्साह

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उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मकर संक्रांति के अवसर पर चंपावत और खटीमा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के साथ-साथ प्रदेश के विकास के लिए करोड़ों की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया।

🕉️ चंपावत: मां रणकोची मंदिर में पूजा और ₹182 करोड़ का निवेश

चंपावत के तल्ला देश क्षेत्र में सीएम धामी ने प्रसिद्ध रणकोची मंदिर में मत्था टेका और क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की।

  • विकास की सौगात: मुख्यमंत्री ने ₹182 करोड़ की 23 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

  • मंदिर सौंदर्यीकरण: रणकोची मंदिर के कायाकल्प के लिए ₹4.5 करोड़ की घोषणा की, जिसकी पहली किस्त जारी हो चुकी है।

  • सम्मान एवं जनसंवाद: * मंदिर के पुजारियों को अंग वस्त्र और धार्मिक पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया।

    • कलश यात्रा में प्रतिभाग किया और ग्रामीणों के साथ जनसंवाद कर लाभार्थियों को सहायता सामग्री वितरित की।

🏗️ चंपावत को मिलीं 7 बड़ी घोषणाएं

सीएम ने चंपावत को आदर्श जिला बनाने के संकल्प के तहत सात महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की:

  1. बाढ़ सुरक्षा: सीम खेत चुका एवं सौराई आदि क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य।

  2. मंदिरों का सौंदर्यीकरण: तल्ला देश के विभिन्न प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार।

  3. पूर्णागिरी मेला 2026: मेला संचालन हेतु शासन से ₹2.5 करोड़ की धनराशि।

  4. सड़क सुधार: चंपावत विधानसभा के विभिन्न मोटर मार्गों का डामरीकरण।

  5. स्वास्थ्य सेवा: जिला चिकित्सालय में निर्माणाधीन क्रिटिकल यूनिट में लिफ्ट का निर्माण

  6. आरोग्य मंदिर: ग्रामसभा नीड में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ ANM उपकेंद्र की स्थापना।

  7. सैनिक कल्याण: इंटीग्रेटेड सैनिक कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए 15 नाली भूमि का आवंटन।


🎊 खटीमा: उत्तरायणी कौतिक मेले का शुभारंभ

चंपावत के बाद सीएम धामी अपने गृह क्षेत्र खटीमा पहुंचे, जहाँ उन्होंने तराई बीज निगम मैदान में कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति द्वारा आयोजित मेले का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया।

  • सांस्कृतिक संदेश: उन्होंने उत्तरायणी, लोहड़ी और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मकर संक्रांति का महत्व आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों है।

  • उत्तरायणी का महत्व: सीएम ने इसे मात्र एक त्योहार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और जीवन दर्शन का उत्सव बताया।

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