देहरादून | सोमवार, 16 फरवरी, 2026: उत्तराखंड की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और बेरोजगारी के खिलाफ आज मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राजधानी की सड़कों पर उतरकर प्रचंड विरोध प्रदर्शन किया। परेड ग्राउंड से लेकर ‘लोक भवन’ (राजभवन) तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम नजर आया, जिसे पार्टी ने “निर्णायक लड़ाई” करार दिया है।
🏟️ परेड ग्राउंड में ‘हुंकार’: दिग्गजों ने एक सुर में बोला हमला
कूच से पहले परेड ग्राउंड में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जहाँ प्रदेश के सभी शीर्ष नेता एक मंच पर एकजुट नजर आए।
| नेता | प्रमुख बयान / आरोप |
| यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष) | “राज्य में जंगलराज कायम है। सरकार ने जनादेश का अपमान किया है। पहाड़ों में स्कूल बंद हो रहे हैं और आपदा प्रभावितों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं।” |
| करन माहरा (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष) | “दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं, महिला अपराध बढ़ रहे हैं और भर्ती घोटालों से युवा मायूस हैं। अब किसान भी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।” |
| हरक सिंह रावत (चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष) | “देहरादून में 15 दिन में 5 हत्याएं होना कानून-व्यवस्था की विफलता है। हम प्रदेश को भू और शराब माफियाओं से मुक्ति दिलाकर रहेंगे।” |
🔥 आंदोलन के मुख्य मुद्दे
कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए 8 सूत्रीय ‘आक्रोश पत्र’ तैयार किया है:
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बिगड़ती कानून-व्यवस्था: राजधानी में बढ़ती हत्याएं और बेखौफ अपराधी।
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महिला सुरक्षा: अंकिता भंडारी प्रकरण से लेकर वर्तमान में बढ़ते महिला उत्पीड़न के मामले।
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भ्रष्टाचार एवं पेपर लीक: सरकारी भर्तियों में घोटाले और युवाओं की बेरोजगारी।
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आपदा प्रबंधन में विफलता: धराली और जोशीमठ जैसे क्षेत्रों में आपदा प्रभावितों की अनदेखी।
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जंगली जानवरों का आतंक: पहाड़ों में गुलदार और अन्य जानवरों के बढ़ते हमले।
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किसान मुद्दे: गन्ने और सेब के समर्थन मूल्य को लेकर असंतोष।
🚧 प्रशासनिक सतर्कता और टकराव
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बैनर-पोस्टर विवाद: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने रात भर में कांग्रेस के पोस्टर और बैनर हटवा दिए ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके।
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बैरिकेडिंग: राजभवन कूच के दौरान पुलिस ने शहर के कई हिस्सों में भारी बैरिकेडिंग की है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है।
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सुरक्षा बल: पीएसी और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
🗣️ निष्कर्ष
कांग्रेस के इस आंदोलन ने साफ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। जहां गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरीश रावत जैसे नेता कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इस भीड़ के जरिए सरकार को यह संदेश देना चाहती है कि वह जन-मुद्दों पर पीछे हटने वाली नहीं है।
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