
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा खोखला, भाजपा ने उत्तराखंड की नारी शक्ति का किया अपमान: अलका पाल
महाराणा प्रताप चौक पर जुटे कांग्रेसी, भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर जताया आक्रोश
राजू अनेजा, काशीपुर।अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। काशीपुर में महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता महाराणा प्रताप चौक पर एकत्रित हुए। यहां कैंडल मार्च निकालकर भाजपा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। कांग्रेसियों ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े जनभावनाओं के मुद्दे से जोड़कर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक बेटी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय व्यवस्था पर भरोसे से भी जुड़ा है।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण ने भाजपा के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस संवेदनशील मामले को लेकर जनता के मन में उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
अलका पाल ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग उत्तराखंड की जनता की आवाज है और कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप बैठने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और न्याय के सवाल पर सरकार को जवाबदेही से पीछे नहीं हटना चाहिए।
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर उठाए सवाल
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष अनुपम शर्मा ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले को लेकर उठे सवालों और जनता की भावनाओं के बीच दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले ने राजनीतिक विवाद को और हवा दी है।
अनुपम शर्मा ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार की मांग पर मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने और प्रकरण से जुड़े सवालों के बीच भाजपा नेतृत्व को जनता की शंकाओं का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से उत्तराखंड की महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोप कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक बयान हैं। दुष्यंत गौतम के खिलाफ किसी आरोप या कानूनी स्थिति को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच संबंधी प्रमाण आवश्यक हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा—न्याय और जवाबदेही से पीछे न हटे सरकार
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को अपने आचरण की समीक्षा करनी चाहिए। नेताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग दोहराते हुए कहा कि इस मामले में उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ दिया जाना चाहिए।
ये नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
कैंडल मार्च में पूर्व महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन, विमल गुड़िया, मनोज जोशी, ब्रह्मपाल, एडवोकेट इंदर सिंह, डॉ. दीपिका गुड़िया, संदीप सहगल, इंदर सेठी, संदीप चतुर्वेदी, निशित गुड़िया, सुरेंद्र वाटला, माजिद अली, त्रिलोक सिंह अधिकारी, कुलदीप सिंह, महेंद्र बेदी, जितेंद्र सरस्वती, युवा कांग्रेस अध्यक्ष सारिम सैफी, किसान कांग्रेस अध्यक्ष परम सिद्धू, सेवादल अध्यक्ष अनीस अंसारी, अनिल शर्मा, अनिल सिंह, मंसूर अली, गौरव रस्तोगी, मंसूर मेफेयर, ओम शर्मा, दलजीत सिंह, यथार्थ गुड़िया, अफसर अली, जगदीश पनेरु, राकेश भगत, पंकज पंत, गुल्लू महागीर, सुभाष चंद्र, अभिषेक अरोरा, मीणा आर्य, रंजना गुप्ता, डॉ. करण सिंह पाल, जगदीश पाल, सुंदरलाल पाल, कृष्ण कुमार, दीपक गुप्ता, रियासत हुसैन, डॉ. आरिफ, फिरोज गांधी, वसीम राजा, कलुआ महागीर, रवि, मोहम्मद कयूम, संजय बोहरा, अमरजीत सिंह, आकाश कुमार और रवि खाती सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस ने प्रदर्शन के जरिए स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय, महिलाओं की सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा पार्टी उठाती रहेगी। महाराणा प्रताप चौक पर हुए इस प्रदर्शन ने काशीपुर में इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गरमा दिया।
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