हल्द्वानी: उत्तराखंड जल संस्थान संविदा श्रमिक संघ ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों का लंबे समय से समाधान न होने पर प्रबंधन और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता (EE) को एक ज्ञापन सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर तुरंत सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगामी 25 मई से उग्र धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
श्रम कानूनों के उल्लंघन और समय पर वेतन न मिलने से आक्रोश
अधिशासी अभियंता को सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन में संविदा श्रमिकों ने आरोप लगाया कि विभाग में उनके वेतन भुगतान को लेकर श्रम कानूनों (Labor Laws) का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। श्रमिकों को न तो न्यूनतम मजदूरी के मानकों के तहत भुगतान हो रहा है और न ही अन्य वैधानिक सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, हर महीने वेतन का भुगतान समय पर नहीं होने के कारण संविदा कर्मियों के सामने परिवार के भरण-पोषण और आर्थिक तंगी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है।
अल्टीमेटम के बाद विभाग में हलचल तेज
संविदा श्रमिक संघ के अध्यक्ष महेश चंद्र और सचिव पवन कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि श्रमिक लंबे समय से धैर्यपूर्वक अपनी मांगों के निस्तारण का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। 25 मई से शुरू होने वाले इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी जल संस्थान प्रबंधन की होगी। इस चेतावनी पत्र के बाद जल संस्थान के प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यदि संविदा श्रमिक हड़ताल या धरने पर बैठते हैं, तो भीषण गर्मी के इस सीजन में शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारी संख्या में संविदा कर्मचारी और संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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