हिमालय प्रहरी

फर्जी लाइसेंस से हथियार खरीदने वालों को कोर्ट का झटका, अग्रिम जमानत खारिज

खबर शेयर करें -

राजू अनेजा,काशीपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदने के चर्चित मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। काशीपुर की अदालत ने आरोपी सौरभ अग्रवाल और गौरव अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि आरोप संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस बनवाने और उसके आधार पर हथियार खरीदने से जुड़े हैं।

अदालत में दाखिल याचिका में आरोपियों ने दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर झूठे तथ्यों पर आधारित है और उन्होंने न तो कोई फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न ही फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे। उन्होंने गिरफ्तारी की स्थिति में भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की दलील देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी।

जांच में सामने आए गंभीर तथ्य

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों और अन्य सह-अभियुक्तों ने योजनाबद्ध तरीके से अपने दस्तावेजों में काशीपुर की बजाय उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का पता दर्शाकर फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लाइसेंस राष्ट्रीय डेटाबेस पोर्टल पर भी प्रदर्शित किए गए और उन्हीं के आधार पर हथियार खरीदे गए।

एक ही गन हाउस से खरीदे गए हथियार

जांच के दौरान मिले अभिलेखों के अनुसार आरोपियों ने काशीपुर स्थित एक गन हाउस से फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे। दस्तावेजों की जांच में लाइसेंसों पर शाहजहांपुर से जारी होने का उल्लेख मिला, जबकि बाद में जिला प्रशासन शाहजहांपुर ने स्पष्ट किया कि संबंधित लाइसेंस आरोपियों के नाम कभी जारी ही नहीं किए गए थे।

राइफल, पिस्टल और बंदूक खरीदने के आरोप

अभियोजन के अनुसार सौरभ अग्रवाल ने कथित फर्जी लाइसेंस के आधार पर .22 बोर राइफल और 7.62 बोर पिस्टल खरीदी, जबकि गौरव अग्रवाल द्वारा भी उसी आधार पर एसबीबीएल बंदूक खरीदे जाने के आरोप हैं।

आपराधिक इतिहास का भी हवाला

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं और मामले की विवेचना अभी जारी है।

अदालत ने माना गंभीर अपराध

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि आरोप संगठित अपराध, कूटरचना, धोखाधड़ी तथा अवैध रूप से शस्त्र प्राप्त करने जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हैं। ऐसे में इस स्तर पर आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज

अंततः अदालत ने सौरभ अग्रवाल और गौरव अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी, जिससे फर्जी लाइसेंस और हथियार खरीद प्रकरण में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को और बल मिला है।

Exit mobile version