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माता के दर्शन से पहले ‘शेर’ के दर्शन ! नवरात्र से पहले मेला क्षेत्र में गुलदार की दस्तक को कोई मान रहा शुभ संकेत, तो कोई दहशत में

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राजू अनेजा, काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी के प्रसिद्ध चैती मेले से ठीक पहले मेला क्षेत्र में गुलदार की दस्तक ने इलाके में हलचल मचा दी है। मेला परिसर से सटी एक गली में बीती रात दो गुलदार घूमते हुए दिखाई दिए, जिनकी तस्वीरें पास में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गईं। जैसे ही यह तस्वीरें क्षेत्र में फैलीं, लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया। हालांकि नवरात्र और चैती मेले से पहले गुलदार के दिखने को कुछ लोग ‘माता का वाहन’ मानकर इसे शुभ संकेत भी बता रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से अधिकांश लोग इसे चिंताजनक मान रहे हैं और प्रशासन से सतर्कता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

पहले भी टीला क्षेत्र में दिख चुके हैं गुलदार

मेला परिसर से सटे गोविषाण टीला क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से गुलदारों की हलचल देखी जाती रही है। क्षेत्रवासियों के अनुसार बीते चार-पांच सालों में यहां तेंदुओं का एक छोटा कुनबा सक्रिय रहा है, जो समय-समय पर आसपास के इलाकों में भी दिखाई देता रहा है। लोगों की बढ़ती चिंता को देखते हुए पुरातत्व विभाग और स्थानीय नागरिकों की मांग पर वन विभाग ने पहले भी इस क्षेत्र में पिंजरे लगाकर अभियान चलाया था। उस दौरान अलग-अलग समय पर पांच गुलदारों को पकड़कर सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा गया था।

सीसीटीवी में कैद हुई गुलदार की हलचल

हाल के दिनों में एक बार फिर गोविषाण टीला और उसके आसपास के इलाकों में गुलदार की हलचल देखी जा रही है। बीते दिनों ब्लॉक कार्यालय के सामने स्थित एक गली में देर रात दो गुलदार घूमते हुए दिखाई दिए। पास में लगे सीसीटीवी कैमरों में उनकी तस्वीरें कैद हो गईं। सुबह जब यह तस्वीरें स्थानीय लोगों के सामने आईं तो इलाके में दहशत फैल गई। लोगों का कहना है कि यदि रात के समय गुलदार रिहायशी इलाकों में पहुंच सकता है तो मेला परिसर में भी उसके आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

तीन दिन बाद शुरू होगा चैती मेला

गौरतलब है कि 19 मार्च से मां बाल सुंदरी देवी का प्रसिद्ध चैती मेला शुरू होने जा रहा है। यह मेला क्षेत्र का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले के दौरान दिन-रात श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और मेला परिसर के आसपास की गलियों और रास्तों पर भी भारी आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि गुलदार की मौजूदगी बनी रहती है तो किसी भी समय जनहानि की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

सुरक्षा बढ़ाने की उठी मांग

इधर मंदिर प्रबंधन और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से टीला क्षेत्र और मेला परिसर के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मेले के दौरान वन विभाग की नियमित गश्त कराई जाए और जरूरत पड़ने पर टीला क्षेत्र में फिर से पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की कार्रवाई की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

क्या बोले लोग

“चैती मेला 19 मार्च से शुरू हो रहा है और मेला परिसर से सटी गली में गुलदार दिखाई देने से लोगों में दहशत है। प्रशासन को चाहिए कि मेले के दौरान टीला क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त कराई जाए।”
— पंडा विकास अग्निहोत्री, मुख्य पंडा, मां बाल सुंदरी देवी मंदिर

“बीते कुछ दिनों से टीला क्षेत्र में गुलदार फिर दिखाई देने लगे हैं। मेला प्रशासन और वन विभाग से बात कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कराए जाएंगे, क्योंकि चैती मेला दिन-रात चलता है। जनसुरक्षा सर्वोपरि है।”
— अनिल कुमार, पार्षद, जसपुर खुर्द क्षेत्र

“टीला से सटे रास्ते से मां भगवती की डोला भी आता है और चैती मेले के दौरान अधिकांश क्षेत्रवासी इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। इसलिए मेला प्रशासन को जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए।”
— निशान सिंह, पूर्व अध्यक्ष, मंडी समिति

 

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