हिमालय प्रहरी

खटीमा के जंगलों में कोहराम: सुरई रेंज में 8 माह की टाइगर शावक और किलपुरा रेंज में नर हाथी का मिला शव; आपसी संघर्ष में मौत की आशंका

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खटीमा: उधम सिंह नगर जनपद के खटीमा उपवन प्रभाग से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग को झकझोर देने वाली दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। प्रभाग की सुरई वन रेंज में जहां एक 8 माह की मादा टाइगर शावक का शव बरामद हुआ है, वहीं किलपुरा वन रेंज में एक नर हाथी मृत अवस्था में पाया गया है। एक ही दिन में दो राष्ट्रीय वन्यजीवों की मौत की खबर से वन महकमे में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी दलबल के साथ दोनों घटनास्थलों पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच और विधिक निरीक्षण के बाद अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही वन्यजीवों की मौत जंगल में वर्चस्व को लेकर हुए आपसी संघर्ष (In-fighting) के कारण हुई है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व सीमा पर मिली दम तोड़ चुकी मादा शावक

तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज का जंगल क्षेत्र उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) से लगा हुआ है, जिसके कारण इस पूरे कॉरिडोर में बाघों की भारी आवाजाही रहती है।

  • गश्त के दौरान मिला शव: सुरई रेंज के वन दरोगा राजू दास, वनरक्षक राहुल कुमार और वाचर लाला राम जब सीमावर्ती क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे, तभी उन्हें बग्गा-55 कंपार्टमेंट क्षेत्र में एक शावक बेसुध पड़ा दिखाई दिया। पास जाने पर पता चला कि उसकी मृत्यु हो चुकी है।

  • अधिकारियों ने संभाला मोर्चा: रेंजर राजेंद्र मनराल की सूचना पर डीएफओ (DFO) हिमांशु बांगड़ी और एसडीओ (SDO) संचिता वर्मा ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। वन विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. राहुल सती और हिमांशु पांगती के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम करने पर पता चला कि मृत मादा शावक की उम्र महज 8 माह थी और उसके शरीर पर आपसी संघर्ष के गहरे घाव थे। इसके बाद सुरई वन परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

हाथियों की गणना के दौरान कक्ष संख्या तीन में मिला मृत हाथी, दांत सुरक्षित

दूसरी ओर, खटीमा के ही किलपुरा वन रेंज में हाथियों की गणना (एलीफेंट सेंसस) के दौरान एक और दुखद घटना सामने आई।

  • गणना टीम को दिखा शव: वन विभाग की टीम जब पूर्वी किलपुरा वन क्षेत्र के कक्ष संख्या तीन में हाथियों की गिनती के काम में जुटी थी, तभी वनकर्मी हेमंत कुमार को एक विशालकाय हाथी मृत अवस्था में दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी किलपुरा रेंजर मनोज कुमार पांडे को दी।

  • गर्दन और पेट पर चोट के निशान: मौके पर पहुंचीं एसडीओ संचिता वर्मा ने बताया कि मृत हाथी के दोनों बेशकीमती दांत पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार (Poaching) की बात से साफ इनकार किया जा सकता है। हाथी की गर्दन और पेट पर किसी अन्य भारी हाथी के हमलों और संघर्ष के स्पष्ट निशान मिले हैं। प्रथम दृष्टया यह किसी दूसरे शक्तिशाली नर हाथी से हुए खूनी संघर्ष का मामला है।

इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट डीएफओ पूर्वी तराई वन प्रभाग हल्द्वानी को भेज दी गई है। उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में डॉक्टरों का विशेष पैनल हाथी के शव का पोस्टमार्टम करेगा, जिसके बाद ही मौत के सटीक कारणों पर अंतिम विधिक मुहर लग सकेगी। जंगलों में वन्यजीवों के बीच बढ़ते इस हिंसक अंतर्द्वंद्व ने वन अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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