मालधन चौड़ में आस्था का बड़ा केंद्र बना डेरा श्री हरिधाम, पूर्णिमा पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की संगत; गौ-सेवा, मानव सेवा और नशामुक्ति अभियान से जुड़ रहे लोग
रामनगर। कुमाऊं की धरती पर कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां आस्था के साथ सामाजिक सरोकार भी दिखाई देते हैं। नैनीताल जिले के रामनगर के मालधन चौड़, तुमरिया डाम नंबर-2 स्थित डेरा श्री हरिधाम भी ऐसा ही एक धार्मिक एवं सामाजिक केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां भगवान शिव की आराधना के साथ नशामुक्ति, गौ-सेवा, मानव सेवा और सनातन संस्कृति के प्रचार को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।
पंचधातु शिवलिंग बना आस्था का प्रमुख केंद्र
डेरा श्री हरिधाम की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां स्थापित पंचधातु निर्मित शिवलिंग प्रमुख है। धाम से जुड़े श्रद्धालुओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सोना, चांदी, तांबा, पीतल और जस्ता जैसी पांच धातुओं से निर्मित शिवलिंग की स्थापना महादेव की प्रेरणा और आदेश की मान्यता के साथ की गई है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शिवलिंग के दर्शन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से जूझने की शक्ति प्राप्त होती है।
‘पांच सोमवार’ की आस्था, मनोकामना पूर्ण होने का विश्वास
धाम से जुड़ी मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु लगातार पांच सोमवार यहां पहुंचकर भगवान शिव को जल अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करता है, उसे महादेव की कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इसे मानसिक परेशानियों और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की आस्था से जोड़ते हैं।
हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं और श्रद्धालुओं की आस्था हैं, जिन्हें धाम से जुड़े लोग विशेष महत्व देते हैं।
पूर्णिमा पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की संगत
डेरा श्री हरिधाम की पहचान अब स्थानीय क्षेत्र से आगे बढ़ती जा रही है। धाम से जुड़े लोगों के अनुसार, हर पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।
पूर्णिमा के दिन धाम परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है और पूरा परिसर धार्मिक वातावरण में नजर आता है।
आस्था के साथ नशे के खिलाफ भी जंग
डेरा श्री हरिधाम की गतिविधियों का एक अहम पक्ष नशामुक्ति अभियान भी है। धाम के प्रमुख परम पूज्य श्री गुरजंट सिंह महाराज के मार्गदर्शन में लोगों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ एवं संस्कारित जीवन अपनाने का संदेश दिया जाता है।
धाम से जुड़े लोगों का दावा है कि कई युवाओं और ग्रामीणों ने नशे से दूरी बनाकर बेहतर जीवन की ओर कदम बढ़ाया है। महाराज के संदेशों में नशे से मुक्ति के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया जाता है।
गौ-सेवा बनी धाम की पहचान
धाम परिसर में गौ-सेवा पर भी विशेष जोर दिया जाता है। असहाय, बीमार और बेसहारा गोवंश की देखभाल के साथ उनके भोजन और उपचार की व्यवस्था में सेवा से जुड़े लोग जुटे रहते हैं।
धाम से जुड़े लोगों का कहना है कि गौ-सेवा को जीव-दया और ईश्वर सेवा का माध्यम मानते हुए इस कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी समय-समय पर भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
भंडारे में प्रसाद, जरूरतमंदों के लिए सेवा
हर पूर्णिमा को आयोजित होने वाला भंडारा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ जरूरतमंद लोगों को भी भोजन कराया जाता है। धाम का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना बताया जाता है।
सनातन संस्कृति और राष्ट्रसेवा का संदेश
डेरा श्री हरिधाम में सनातन संस्कृति के मूल्यों, संस्कार, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम का संदेश भी दिया जाता है। धाम प्रमुख श्री गुरजंट सिंह महाराज ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से धर्म, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े रहने का आह्वान करते हैं।
उनका संदेश है कि सनातन संस्कृति के मूल्यों को जीवन में उतारने के साथ समाज और देश के प्रति अपने दायित्व को भी निभाया जाना चाहिए।
सिर्फ मंदिर नहीं, सेवा और संस्कार का केंद्र बनने की कोशिश
रामनगर के मालधन चौड़ में स्थित डेरा श्री हरिधाम आज आस्था और सामाजिक सेवा को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। एक ओर पंचधातु शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आकर्षण का केंद्र है तो दूसरी ओर नशामुक्ति, गौ-सेवा और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य धाम को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हैं।
यही वजह है कि डेरा श्री हरिधाम अब केवल पूजा-अर्चना के स्थल के रूप में नहीं, बल्कि आस्था के साथ सेवा, संस्कार और नशामुक्त समाज का संदेश देने वाले केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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