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गदरपुर का ‘गदर’ शांत कर गए धामी ! एक मंच पर दिखे धामी, अरविंद पांडे और सुखीजा, समर्थकों के नारों ने दिए सियासी संकेत

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बस अड्डे के लोकार्पण से ज्यादा चर्चा सियासी तस्वीरों की

राजू अनेजा, गदरपुर।गदरपुर में शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दौरा केवल नए बस अड्डे के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस कार्यक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति को भी नया संदेश दे दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक अरविंद पांडे और भाजपा नेता सुखीजा एक ही मंच पर नजर आए। मंच पर दिखाई दी सहजता और कार्यकर्ताओं के बीच लगी “अरविंद पांडे जिंदाबाद” की गूंज ने साफ संकेत दिए कि भाजपा अब पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी एकजुटता की राह पर बढ़ रही है।

 

तल्खियों की चर्चा पर लगा विराम!

कुछ माह पहले तक मुख्यमंत्री और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के बीच राजनीतिक दूरी और तल्खियों की चर्चाएं आम थीं। कई मौकों पर दोनों के बीच रिश्तों को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगती रहीं। लेकिन गदरपुर के मंच पर जो तस्वीर सामने आई, उसने उन चर्चाओं पर काफी हद तक विराम लगा दिया। मुख्यमंत्री के स्वागत में विधायक अरविंद पांडे ने कोई कसर नहीं छोड़ी और पूरा कार्यक्रम भाजपा की एकजुटता का संदेश देता दिखाई दिया।

 

समर्थकों के नारों ने बढ़ाई सियासी हलचल

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अरविंद पांडे के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। दिलचस्प बात यह रही कि यह सब मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुआ। इसे राजनीतिक जानकार केवल उत्साह नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर बदलते समीकरणों के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।

 

2027 की आहट, जोखिम लेने के मूड में नहीं भाजपा

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी किसी भी स्तर पर संगठन या नेताओं के बीच मतभेद की गुंजाइश छोड़ना नहीं चाहते। पार्टी की रणनीति साफ दिखाई दे रही है कि हर प्रभावशाली नेता को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरा जाए, ताकि विपक्ष को कोई मौका न मिले।

 

उधम सिंह नगर का गणित भाजपा के लिए सबसे अहम

उधम सिंह नगर भाजपा के लिए हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन जिले की नौ विधानसभा सीटों में से पार्टी को केवल चार सीटों पर ही जीत मिली थी। यह परिणाम पूरे कार्यकाल में भाजपा नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बना रहा। यही वजह है कि इस बार जिले में किसी भी तरह की अंदरूनी नाराजगी को खत्म करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

 

एक मंच से दिया एकता का संदेश

गदरपुर के मंच से मुख्यमंत्री धामी ने भले ही सीधे तौर पर किसी राजनीतिक विवाद का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी मौजूदगी में सभी प्रमुख नेताओं का साथ खड़ा होना अपने आप में बड़ा संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब 2027 की चुनावी लड़ाई में किसी भी तरह की गुटबाजी या नाराजगी का जोखिम नहीं लेना चाहती। गदरपुर से निकली यह तस्वीर आने वाले दिनों की चुनावी रणनीति का ट्रेलर भी मानी जा रही है।

 

सियासी संदेश साफ

गदरपुर के बस अड्डे का लोकार्पण विकास का कार्यक्रम जरूर था, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चर्चा राजनीतिक रही। धामी, अरविंद पांडे और सुखीजा की एक साथ मौजूदगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा अब चुनावी मोड में है और “सब साथ, सब एक” की रणनीति के साथ 2027 की हैट्रिक की तैयारी शुरू कर चुकी है।

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