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धामी का मिशन हैट्रिक, रुद्रपुर में भाजपा की खींचतान… क्या ऊधम सिंह नगर में फिर बदलेंगे सियासी समीकरण?

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रुद्रपुर के घटनाक्रमों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल, शिलापट्ट विवाद से लेकर मंच की नाराजगी तक चर्चाओं का दौर; विपक्ष साध रहा अवसर

राजू अनेजा।रुद्रपुर। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन ऊधम सिंह नगर की राजनीति ने अभी से रफ्तार पकड़ ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार भाजपा की नजर ऊधम सिंह नगर की सभी विधानसभा सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करने की होगी। वहीं दूसरी ओर, रुद्रपुर में हाल के घटनाक्रमों ने भाजपा के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि, पार्टी की ओर से किसी तरह के मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

 

पिछली बार 9 में सिर्फ 4 सीटों पर मिली थी जीत

विगत विधानसभा चुनाव में ऊधम सिंह नगर जिले की नौ विधानसभा सीटों में भाजपा को केवल चार सीटों पर जीत मिली थी, जबकि बाकी सीटें विपक्ष के खाते में गई थीं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार पार्टी जिले में अपना प्रदर्शन बेहतर करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से जिले की हर विधानसभा सीट को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

रुद्रपुर में शिलापट्ट विवाद ने बढ़ाई चर्चाएं

रुद्रपुर में पहले त्रिशूल चौक के लोकार्पण के दौरान लगाए गए शिलापट्ट से स्थानीय विधायक शिव अरोड़ा का नाम नहीं होने को लेकर चर्चा शुरू हुई। मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा के शिलान्यास एवं लोकार्पण कार्यक्रम में भी कई शिलापट्टों पर विधायक का नाम नहीं दिखा। इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

 

मंच की तस्वीरों ने भी बढ़ाई राजनीतिक हलचल

 

हालिया कार्यक्रमों में लगे कुछ राजनीतिक नारों और नेताओं के संबोधनों को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे स्थानीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के रूप में देख रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से इस विषय पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।

क्या कांग्रेस को मिल सकता है राजनीतिक अवसर?

रुद्रपुर की राजनीतिक चर्चाओं में इन दिनों एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि यदि भाजपा के भीतर मतभेदों की धारणा बनी रहती है तो क्या इसका राजनीतिक लाभ कांग्रेस उठा सकती है? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव में केवल संगठन ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की एकजुटता भी बड़ी भूमिका निभाती है। हालांकि, यह विश्लेषण है और किसी चुनावी परिणाम का दावा नहीं।

राजकुमार ठुकराल की सक्रियता पर भी नजर

कांग्रेस खेमे में भी चुनावी तैयारियों को लेकर हलचल है। पूर्व भाजपा विधायक और वर्तमान में कांग्रेस से जुड़े राजकुमार ठुकराल का नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि कांग्रेस ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन स्थानीय राजनीति में उनक सक्रियता पर नजर रखी जा रही है।

हाईकमान की चुप्पी भी चर्चा का विषय

लगातार सामने आ रहे घटनाक्रमों के बावजूद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व या केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी की आंतरिक रणनीति को लेकर बिना आधिकारिक जानकारी के कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

धामी के मिशन के सामने स्थानीय चुनौती?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे समय में यदि किसी जिले में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं तेज होती हैं, तो विपक्ष उसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती केवल विपक्ष से मुकाबले की नहीं, बल्कि एकजुटता का संदेश देने की भी होगी।

सवाल जो रुद्रपुर की सियासत में गूंज रहा है

रुद्रपुर में लगातार सामने आए घटनाक्रमों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सब केवल संयोग और प्रशासनिक चूक है, या फिर स्थानीय राजनीति के बदलते समीकरणों का संकेत? इसका जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टियों की रणनीति से ही मिलेगा।

नोट: यह खबर हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों, स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं और विश्लेषणों पर आधारित है। इसमें किसी भी दल या नेता के बारे में कोई आरोप या निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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