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डॉक्टर की शर्मनाक करतूत; सिर के गहरे घाव पर टांकों की जगह लगा दी ‘स्टेपलर’ की पिन, वीडियो वायरल होने पर भड़का गुस्सा

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नवादा (बिहार): नवादा जिले के वारिसलीगंज क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का मजाक बना दिया है। एक ग्रामीण डॉक्टर ने घायल युवक के सिर पर मेडिकल सुई-धागे (Sutures) के बजाय ऑफिस में कागज स्टेपल करने वाली मशीन से टांके लगा दिए।

1. क्या है पूरा मामला?

यह घटना 3 मार्च को वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के नरोमुरार गांव में हुई।

  • हादसा: गांव का एक युवक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था, जिसके सिर पर गहरा जख्म हो गया और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।

  • इलाज के नाम पर मजाक: ग्रामीण उसे पास के ही एक स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए। वहां डॉक्टर ने घाव की गंभीरता को देखने के बाद मेडिकल मानकों को दरकिनार करते हुए साधारण स्टेपलर मशीन से युवक के सिर को पिन कर दिया।

2. वीडियो वायरल और सोशल मीडिया पर आक्रोश

घटना के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बना लिया।

  • वीडियो के दृश्य: वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि डॉक्टर बिना किसी संकोच के युवक के सिर के घाव पर स्टेपलर पिन ठोक रहा है।

  • जनता की प्रतिक्रिया: वीडियो सामने आते ही लोगों ने इसे ‘मौत का इलाज’ करार दिया। नेटिजन्स ने बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।

3. मेडिकल रिस्क: क्यों है यह खतरनाक?

विशेषज्ञों के अनुसार, साधारण स्टेपलर पिन का इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र में करना बेहद घातक हो सकता है:

  • इंफेक्शन (Sepsis): लोहे की साधारण पिन से शरीर में गंभीर संक्रमण या सेप्सिस फैल सकता है।

  • टिटनेस का खतरा: पिन में जंग होने की स्थिति में मरीज को टिटनेस हो सकता है।

  • घाव का न भरना: मेडिकल स्टेपलर अलग होते हैं, साधारण स्टेपलर से घाव जुड़ने के बजाय मांस फटने का डर रहता है।


Snapshot: नवादा चिकित्सा लापरवाही कांड

विवरण जानकारी
स्थान नरोमुरार गांव, वारिसलीगंज (नवादा)
तारीख 3 मार्च 2026
लापरवाही टांकों की जगह साधारण स्टेपलर का उपयोग
मांग झोलाछाप डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई और क्लिनिक सील करने की मांग

प्रशासनिक रुख का इंतजार

स्थानीय ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस ‘क्वैरी’ (झोलाछाप डॉक्टर) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और क्लिनिक को तत्काल सील करने की मांग की है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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