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उत्तराखंड: युद्ध की आहट से ‘इंडक्शन’ का संकट; बाजारों में मची लूट, ₹2000 का चूल्हा ₹3000 में बिक रहा, कई जगह स्टॉक खत्म

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देहरादून (13 मार्च 2026): रूस-यूक्रेन के बाद अब ईरान और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष का सीधा असर उत्तराखंड की रसोई पर दिखने लगा है। एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर फैली आशंकाओं के बीच लोग अब कुकिंग के वैकल्पिक माध्यमों, विशेषकर इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हों की ओर भाग रहे हैं।

1. डिमांड इतनी कि दुकानों में बचा नहीं एक भी पीस

राजधानी देहरादून के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में इंडक्शन की मांग अचानक दो से तीन गुना बढ़ गई है।

  • आउट ऑफ स्टॉक: दुकानदार अभिषेक शर्मा के अनुसार, कंपनी से आया पूरा लॉट एक ही दिन में बिक गया। सामान्य दिनों में लोग इंडक्शन कम खरीदते थे, इसलिए स्टॉक भी सीमित रखा जाता था।

  • बल्क बाइंग: घरेलू ग्राहकों के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी एक साथ 4 से 5 इंडक्शन खरीद रहे हैं ताकि कमर्शियल गैस की किल्लत से निपटा जा सके।

2. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों का खेल

बाजार में कमी का फायदा ऑनलाइन पोर्टल्स और स्थानीय दुकानदार भी उठा रहे हैं:

  • महँगा हुआ सौदा: जो इंडक्शन पहले ₹1,500 से ₹2,000 के बीच आसानी से उपलब्ध थे, उनकी कीमतें अब ₹2,500 से ₹3,000 के पार पहुँच गई हैं।

  • स्कीम खत्म: ई-कॉमर्स साइट्स पर मिलने वाले डिस्काउंट कूपन और ऑफर हटा दिए गए हैं। ‘इंस्टेंट डिलीवरी’ ऐप्स पर इंडक्शन ‘नॉट अवेलेबल’ दिखा रहे हैं।

3. ‘पैनिक’ की वजह: कोरोना की कड़वी यादें और 25 दिन की वेटिंग

मनोचिकित्सक डॉ. मुकुल शर्मा का मानना है कि यह स्थिति ‘पोस्ट-कोरोना सिंड्रोम’ जैसी है। लोग डरे हुए हैं कि अगर युद्ध खिंचा और सप्लाई रुकी, तो खाना कैसे बनेगा?

  • लंबी वेटिंग: कुछ ग्राहकों (आदेश कुमार) का कहना है कि गैस बुकिंग करने पर उन्हें 25 दिन बाद सिलेंडर मिलने की बात कही जा रही है। इसी डर ने उन्हें इंडक्शन खरीदने पर मजबूर कर दिया है ताकि बैकअप प्लान तैयार रहे।


Snapshot: इंडक्शन बाजार की ताजा स्थिति

विवरण वर्तमान स्थिति
डिमांड सामान्य से 200% अधिक
कीमत (औसत) ₹500 से ₹1,000 की बढ़ोतरी
उपलब्धता देहरादून की अधिकांश दुकानों में स्टॉक खत्म
मुख्य कारण ईरान-इजरायल युद्ध और गैस शॉर्टेज का डर
गैस बुकिंग स्थिति कई क्षेत्रों में 20-25 दिन की वेटिंग

विशेषज्ञों और दुकानदारों की राय

  • दुकानदार: “माल की सप्लाई पीछे से आ रही है, लेकिन मांग इतनी ज्यादा है कि काउंटर पर पहुँचते ही बिक जा रहा है।”

  • ग्राहक: “गैस की कोई किल्लत भले न हो, लेकिन 25 दिन की वेटिंग डरा रही है। बैकअप के लिए बिजली का चूल्हा जरूरी है।”

  • मनोचिकित्सक: “यह एक मानवीय मूल है कि संकट देख व्यक्ति सबसे पहले अपने परिवार के लिए भोजन और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, इसीलिए पैनिक बाइंग हो रही है।”

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