हल्दूचौड़ (16 मार्च 2026): सेनानी अनिल सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित इस आउटरीच कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को सीमा सुरक्षा बलों की गौरवशाली कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करना था।
1. जवानों के दैनिक जीवन से रूबरू हुए छात्र
भ्रमण के दौरान छात्रों को कैंप के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन कराया गया, जहाँ उन्होंने निम्नलिखित जानकारियां प्राप्त कीं:
-
प्रशिक्षण प्रणाली: बच्चों ने देखा कि किस प्रकार कठिन प्रशिक्षण के माध्यम से जवानों को विषम परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है।
-
कार्यप्रणाली: सीमा सुरक्षा की चुनौतियों और बल द्वारा अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया गया।
-
अनुशासन की सीख: विद्यार्थियों ने जवानों के दैनिक जीवन, उनके अटूट अनुशासन और देश की सीमाओं की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान की कहानियाँ सुनीं।
2. राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा
34वीं वाहिनी के द्वितीय कमान अधिकारी हेमन्त कुमार ने इस अवसर पर छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा:
“देश की सुरक्षा और एकता का महत्व समझना युवा पीढ़ी के लिए अनिवार्य है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल होती है, बल्कि वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित होते हैं।”
3. संवाद और उत्साह
सेमफोर्ड स्कूल के विद्यार्थियों ने जवानों के साथ सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों के बारे में कई सवाल पूछे। बच्चों के लिए यह एक यादगार अनुभव रहा, जहाँ उन्होंने देश के जांबाज सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की।
Snapshot: आईटीबीपी आउटरीच कार्यक्रम
| विवरण | जानकारी |
| आयोजक | 34वीं वाहिनी आईटीबीपी, हल्दूचौड़ |
| प्रतिभागी | सेमफोर्ड स्कूल, हल्द्वानी के छात्र |
| नेतृत्व | सेनानी अनिल सिंह बिष्ट |
| मुख्य उद्देश्य | देशभक्ति जागृत करना एवं कार्यप्रणाली से परिचय |
| प्रमुख संदेश | स्वर्णिम भारत की परिकल्पना और राष्ट्र निर्माण |
निष्कर्ष: आईटीबीपी की यह पहल “स्वर्णिम भारत” के सपने को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। ऐसे कार्यक्रमों से सशस्त्र बलों और नागरिक समाज, विशेषकर युवाओं के बीच संबंधों को मजबूती मिलती है।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
