
एक वकील साहब को एक लड़की से प्यार हो गया. अब वकील साहब उस लड़की से शादी करना चाहते थे. जबकि वकील साहब पहले से ही शादीशुदा थे. यही वजह थी कि लड़की के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे.
इस परेशानी से पार पाने के लिए वकील साहब और उनकी गर्लफ्रेंड ने मिलकर एक साजिश रची. पर उस साजिश को कामयाब बनाने की लिए ज़रूरत थी, एक लाश की. जी हां, एक इंसान की लाश. और फिर उन दोनों ने लाश का इंतजाम कर लिया.
रेलवे ट्रेक पर मिली अज्ञात शख्स की लाश
उत्तर प्रदेश का इटावा शहर. सुंदरपुर रेलवे फाटक के पास रविवार की सुबह एक शख्स की लाश मिलती है. चूंकि मरने वाले की मौत किसी ट्रेन की चपेट में आने की वजह से हुई थी, लाश की हालत बेहद खराब थी. और तो और उसका चेहरा भी कुछ इतना बिगड़ चुका था कि उसकी पहचान भी नामुमकिन थी. खबर मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले तो आस-पास मौजूद लोगों से मरने वाले की पहचान पता करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहने पर लाश को बरामद कर मॉर्चरी में रखवा दिया.
72 घंटे तक मॉर्चरी में रखी जाती है लावारिस लाश
आम तौर पर पुलिस ऐसी लावारिस लाशों को कम से कम 72 घंटे तक मॉर्चरी में रखती है, ताकि अगर कोई मरने वाले का पता करते हुए पुलिस के पास आए, तो लाश की पहचान करा कर उसे मरने वाले के घरवालों के हवाले किया जा सके. और किसी के न आने की सूरत में पुलिस की ऐसी लाशों का अंतिम संस्कार कर देती है.
अगले ही दिन लाश ले गए परिजन
इत्तेफाक से इस मामले में 72 घंटे से काफी पहले यानी मॉर्चरी में रखे जाने के दूसरे ही दिन कुछ लोग अस्पताल पहुंचे और उन्होंने लाश पर अपना दावा किया. ये एक परिवार के लोग थे, जिनमें मरने वाले का पिता, भाई और दूसरे लोग शामिल थे. चूंकि उनके पास हादसे में मारे गए शख्स अतुल कुमार का आधार कार्ड भी मौजूद था, तो पुलिस को अलग से इस दावे की तस्दीक करने की जरूरत नहीं महसूस हुई और लाश अतुल कुमार के घरवालों के हवाले कर दी गई.
मोर्चरी पहुंचा मरने वाले का असली परिवार
यहां तक को सबकुछ ठीक था, लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तब आया, जब अगले ही दिन इस लाश पर दावा करते हुए कुछ और लोग मॉर्चरी पहुंच गए. ये परिवार यूपी के ही ओरैया से आया था और उनका कहना था कि मरने वाला उनका फैमिली मेंबर 40 साल के सत्यवीर राजपूत है. घरवालों का कहना था कि वो दिमागी तौर पर परेशान था और उसका आगरा में इलाज भी चल रहा था और कुछ दिनों पहले वो इटावा की तरफ ही आए थे.
फर्जी निकाले सारे दस्तावेज
अब इस दावे से मामला बुरी तरह उलझ गया क्यों अगर लाश वाकई सत्यवीर राजपूत की थी, तो फिर वो लोग कौन थे, जिन्होंने लाश अतुल कुमार की बता कर उसे अपने साथ ले गए? अब पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की. जांच शुरू होते ही पुलिस को तब जोर का झटका लगा कि जो भी लोग लाश अपने साथ लेकर गए, उनकी ओर से पुलिस को सौंपे गए सारे के सारे दस्तावेज, आधार कार्ड, पहचान पत्र सब नकली थे. और तो और मरने वाले शख्स का आधार कार्ड भी नकली निकला. यानी ये धोखे से लाश ले जाने की अजीब साजिश थी. अब पुलिस ने जांच लाश लेने पहुंचे चार लोगों पर अपनी जांच टिका दी.
सीसीटीवी की मदद से हुई आरोपियों की पहचान
इत्तेफाक से पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज में चारों की तस्वीर नजर आ गई. अब इन तस्वीरों के आधार पर चारों की पहचान पता करने की कोशिश चालू हुई. शुरू में तीन का तो पता नहीं चला, लेकिन चौथे शख्स की पहचान साफ हो गई. ये इटावा का ही एक वकील था हेतराम मित्तल. अब पुलिस ने पहले मित्तल को पकड़ा और उसकी निशानदेही पर फारुक, तसलीम और फुरकान को भी गिरफ्तार कर लिया. ये वही लोग थे जो फर्जी आधार कार्ड सौंप कर लाश ले गए थे. और सत्यवीर राजपूत की लाश को अपने रिश्तेदार अतुल कुमार की लाश बताई थी, जबकि असल में इस पूरी कहानी में अतुल कुमार नाम का सचमुच कोई आदमी है ही नहीं.
50 साल के वकील हेतराम मित्तल की करतूत
लेकिन सवाल ये था कि इस मामले के मास्टरमाइंड 50 साल के वकील हेतराम मित्तल ने आखिर ऐसी अजीबोगरीब हरकत क्यों की? लावारिस लाश को अतुल कुमार की लाश बात कर उसका अंतिम संस्कार करने से उसे क्या फायदा होता? तो जवाब है कि हेतराम खुद से आधे से भी कम उम्र की यानी 22 साल की एक लड़की मुस्कान कोस्टा के साथ इश्क में था और उससे शादी करना चाहता था.
अपनी शादी का रास्ता साफ करना था आरोपी
उसका इरादा अतुल कुमार को मुस्कान का पति दिखा कर उसकी मौत की झूठी कहानी गढ़ने का था, ताकि उसकी शादी का रास्ता साफ हो सके. और वो अतुल की मौत को संदिग्ध बता कर मुस्कान के घरवालों को भी केस मुकदमे में फंसा सके. असल में मुस्कान के घरवालों ने हेतराम पर नाबालिग लड़की को भगाने का केस दर्ज करा रखा था. लेकिन अब मित्तल की पोल खुल चुकी थी.
पहले भी तीन शादी कर चुका है हेतराम मित्तल
कहानी साफ हो जाने पर मित्तल की बीवी शिखा अग्रवाल ने बताया कि मित्तल पहले से ही तीन शादियां कर चुका है. वो रुपये पैसों के लालच में लड़कियों को फंसाता है और उनसे शादी कर लेता है. फिर बाद में मारपीट कर उन्हें भगा देता है. चूंकि हेतराम की एक बीवी शिखा अग्रवाल को हेतराम से दो बच्चे भी हैं, वो हेतराम से कानूनी लड़ाई लड़ रही है. लेकिन इस वारदात ने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए लाश की चोरी की एक चौंकाने वाली कहानी का खुलासा कर दिया.
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