हिमालय प्रहरी

डीएफओ कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में आग: अकाउंट्स, भूमि हस्तांतरण और एस्टैब्लिशमेंट का रिकॉर्ड खाक

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हल्द्वानी/नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल स्थित प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कार्यालय में अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग जाने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह सफाई के दौरान कर्मचारी ने दफ्तर से घना धुआं उठता देख तत्काल उच्च अधिकारियों को मामले की सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में विभाग के अकाउंट्स, भूमि हस्तांतरण और एस्टैब्लिशमेंट (स्थापना) शाखा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज व गोपनीय फाइलें जलकर खाक हो गई हैं। प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।

सफाई कर्मचारी ने देखा धुआं; दमकल ने पाया आग पर काबू

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना सुबह के समय उस वक्त सामने आई जब दफ्तर का सफाई कर्मचारी रोजमर्रा की तरह सफाई करने कार्यालय पहुंचा। कमरों के भीतर से धुआं और आग की लपटें उठती देख उसने तुरंत अधिकारियों व फायर ब्रिगेड को अलर्ट किया। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम पहुंचती, तब तक आग ने कई कमरों को अपनी चपेट में ले लिया था। दमकल कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आग को बाकी हिस्सों में फैलने से रोका और पूरी तरह बुझाया।

ऑनलाइन बैकअप से मिलेगी राहत; जले रिकॉर्ड का शुरू हुआ आकलन

आग की इस घटना में कार्यालय के तीन प्रमुख अनुभागों—अकाउंट्स, भूमि हस्तांतरण और एस्टैब्लिशमेंट के रिकॉर्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। घटना के बाद डीएफओ आकाश गंगवार सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और जले हुए दस्तावेजों का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है।
राहत की बात यह है कि प्रभावित रिकॉर्ड्स में से अधिकांश का डिजिटल डेटा नैनीताल और देहरादून स्थित वन विभाग के केंद्रीय सर्वर व कार्यालयों में ऑनलाइन उपलब्ध है। इससे जले हुए रिकॉर्ड को दोबारा री-स्टोर (पुनर्प्राप्त) करने में आसानी होगी। डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसा विद्युत शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ प्रतीत हो रहा है, हालांकि आग लगने के सटीक कारणों और हुए कुल वित्तीय व भौतिक नुकसान का वास्तविक पता विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
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