देहरादून: उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड और कोहरे के बीच पहाड़ों पर जंगल धधक रहे हैं। गुरुवार को उत्तरकाशी और बागेश्वर में आग से जंगलों को खासा नुकसान हुआ। उत्तरकाशी के बड़कोट में देर रात तक आग बुझाने का सिलसिला जारी था, जबकि बागेश्वर में आग पर काबू पा लिया गया।
📊 वनाग्नि की स्थिति और कारण
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आधिकारिक नुकसान: वन विभाग की वेबसाइट के अनुसार, प्रदेश में 1 नवंबर के बाद 8 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। हालांकि, जिलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।
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मुख्य कारण: लंबे समय से बारिश न होना, दिन में तेज धूप और शुष्क मौसम जंगल में आग भड़कने की मुख्य वजह हैं।
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फायर अलर्ट: फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, गुरुवार को उत्तराखंड में 53 फायर अलर्ट जारी किए गए, जिनमें तीन बड़ी आग के थे।
📍 प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
| जिला/वन प्रभाग | घटना का विवरण | नुकसान |
| उत्तरकाशी (बड़कोट) | अपर यमुना वन प्रभाग क्षेत्र में गुरुवार शाम जंगल धू-धू कर जले। मंगलवार को भी कंसेरु गांव का जंगल जल गया था। | देर रात तक आग बुझाने का सिलसिला जारी। |
| बागेश्वर | गुरुवार को दो जगहों पर आग लगी; एक सप्ताह के भीतर यह चौथी घटना है। | अब तक पाँच हेक्टेयर जंगल जल चुका है। |
| पौड़ी (सिविल वन) | 1 और 2 दिसंबर को कोट ब्लॉक में 5 हेक्टेयर जंगल जल गया। 9 दिसंबर को सिराला में भी आग लगी। | अब तक करीब छह हेक्टेयर में नुकसान। |
| रुद्रप्रयाग | 15 दिसंबर को खेड़ाखाल क्षेत्र में जंगल का बड़ा क्षेत्र जला। | – |
| चमोली | बदरीनाथ वन प्रभाग के मध्य पिंडर रेंज में 13 दिसंबर को लगी आग पर 16 दिसंबर को काबू पाया गया। | – |
| मुनस्यारी | 22 दिसंबर को कालामुनी के जंगल आग की चपेट में आए। | – |
| अल्मोड़ा | बीते एक सप्ताह में वनाग्नि की पाँच घटनाएँ। | अधिकांश मामलों में फायर ब्रिगेड ने काबू पाया। |
📈 उत्तराखंड देश में नंबर वन पर
सीसीएफ वनाग्नि प्रबंधन सुशांत पटनायक ने बताया कि डेढ़ माह में 1919 से ज्यादा फायर अलर्ट आने से उत्तराखंड पूरे देश में नंबर वन पर पहुँच गया है।
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अलर्ट की प्रकृति: विशेषज्ञों का कहना है कि ये अलर्ट जंगल जलने के अलावा कूड़ा जलाने या अन्य कारणों से भी हो सकते हैं।
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सीसीएफ का बयान: सीसीएफ सुशांत पटनायक ने कहा कि 70 प्रतिशत अलर्ट गलत होते हैं और कूड़े या अन्य जगह आग लगने की होती है। हालांकि, हर अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
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प्रदूषण का खतरा: जंगल की आग और कूड़ा जलने से उठने वाला धुआँ पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहा है।
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