
राजू अनेजा, काशीपुर। जिले की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब हिंदूवादी नेता गगन कंबोज ने सीधे सत्ता के केंद्र पर प्रहार करते हुए ऐसा कदम उठा दिया, जिसे सियासी गलियारों में “शेर की मांद में हाथ डालना” बताया जा रहा है। महापौर दीपक बाली की प्रेस वार्ता के जवाब में गगन कंबोज की आक्रामक हुंकार ने काशीपुर की सियासत को हिला कर रख दिया है। कभी बाली के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले गगन कंबोज अब खुलकर विधायक अरविंद पांडे के समर्थन में खड़े नजर आए। प्रेस वार्ता में कंबोज ने बिना किसी लाग-लपेट के महापौर पर ताबड़तोड़ आरोपों की झड़ी लगा दी। किसान आत्महत्या प्रकरण को लेकर उन्होंने एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। इतना ही नहीं, गगन कंबोज ने महापौर की जीत पर भी सवाल खड़े किए और यहां तक कहा कि जीत के जश्न में शामिल होना उनके लिए पाप का भागीदार बनना था। उनके इस बयान ने सियासी हलकों में और हलचल मचा दी है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव और तीखा हो सकता है। यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते संतुलन नहीं साधा, तो काशीपुर ही नहीं, पूरे तराई क्षेत्र में भाजपा की अंदरूनी खींचतान सियासी नुकसान का कारण बन सकती है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महापौर दीपक बाली गगन कंबोज की इस खुली चुनौती का क्या जवाब देते हैं—चुप्पी साधते हैं या फिर सियासी रण और तेज़ होता है। इतना तय है कि भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी अब पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि मंच के बीचोंबीच आ चुकी है
कुल मिलाकर गगन कंबोज के इस आक्रामक तेवर के बाद काशीपुर की राजनीति दो खेमों में बंटती नजर आ रही है। अब निगाहें महापौर दीपक बाली पर टिकी हैं— वह गगन कंबोज के इन तीखे आरोपों का क्या जवाब देंगे?