पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से एक अत्यंत हृदयविदारक और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। ग्रामसभा गडरी के भतकोट तोक में एक आदमखोर गुलदार ने 4 साल की मासूम दृष्टि को अपना निवाला बना लिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है और ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
यहाँ इस दुखद घटना और उसके बाद की स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है:
पौड़ी/सतपुली (3 अप्रैल 2026): मासूम दृष्टि की मौत ने पहाड़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर एक बार फिर पेश की है। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को उठाने से इनकार कर दिया था।
1. घटना का क्रम: निवाला बनी मासूम
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तारीख और समय: गुरुवार रात लगभग 9:00 बजे।
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परिस्थितियां: भतकोट निवासी हरेंद्र सिंह की 4 वर्षीय पुत्री दृष्टि रात का खाना खाने के बाद घर के दरवाजे के पास ही हाथ धो रही थी।
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हमला: घात लगाकर बैठे गुलदार ने पलक झपकते ही मासूम पर हमला किया और उसे जबड़ों में दबाकर झाड़ियों की ओर भाग निकला। पिता हरेंद्र ने शोर मचाते हुए गुलदार का पीछा भी किया, लेकिन अंधेरे के कारण वह उसे बचा नहीं सके।
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शव की बरामदगी: ग्रामीणों ने रात में ही खोजबीन शुरू की और घर से लगभग 1 किलोमीटर दूर छिटला गदेरे में बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
2. आक्रोशित ग्रामीणों का प्रदर्शन और घेराव
घटना की सूचना मिलते ही सतपुली पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा:
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शव उठाने से इनकार: ग्रामीणों ने रात भर शव को उठने नहीं दिया और जिलाधिकारी (DM) व प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
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डीएफओ का घेराव: शुक्रवार सुबह जब डीएफओ महातिम यादव मौके पर पहुँचे, तो सैकड़ों ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और गुलदार को ‘आदमखोर’ घोषित कर मारने की मांग की।
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समझौता: काफी देर चली वार्ता और गुलदार को मारने के आदेश की प्रक्रिया शुरू करने के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद मौके पर ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की गई।
3. विभाग की तत्काल कार्रवाई
क्षेत्र में दहशत को देखते हुए वन विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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निगरानी: गांव में 2 कैमरा ट्रैप और 2 लाइव सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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पकड़ने की कोशिश: क्षेत्र में 2 पिंजरे लगा दिए गए हैं ताकि हमलावर गुलदार को पकड़ा जा सके।
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विशेष टीमें: 15 सदस्यीय दो विशेष टीमें क्षेत्र में गश्त के लिए तैनात की गई हैं।
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चिह्नीकरण: गुलदार के पदचिह्न और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए हैं ताकि उसे चिह्नित कर मारने की अनुमति (Hunting Order) ली जा सके।
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