हल्द्वानी के नन्धौर उप वन प्रभाग ने अवैध लीसा (Resin) तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में न केवल वन संपदा की चोरी, बल्कि वाहनों के नंबर बदलकर और चेसिस नंबर मिटाकर की गई ‘हाई-प्रोफाइल’ जालसाजी का भी खुलासा हुआ है।
यहाँ इस जांच और दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) का पूरा ब्यौरा दिया गया है:
हल्द्वानी (11 अप्रैल 2026): हैड़ाखान मार्ग पर पकड़े गए अवैध लीसा से भरे वाहन की जांच में वन विभाग को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। आरोपित ने तस्करी के लिए फर्जी नंबर प्लेट और दस्तावेजों का सहारा लिया था।
1. घटना की पृष्ठभूमि: सुनियोजित तस्करी
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जब्ती: 24 दिसंबर 2025 को छकाता रेंज के हनुमानगढ़ी बैरियर के पास एक संदिग्ध टेम्पो ट्रैवलर खड़ा मिला था।
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बरामदगी: वाहन की तलाशी लेने पर उसमें 114 टिन अवैध लीसा (लगभग 17 क्विंटल) बरामद हुआ।
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जालसाजी: वन विभाग ने जब वाहन की जांच की, तो पाया कि उसके इंजन और चेसिस नंबर पूरी तरह मिटाए गए थे और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी।
2. परिवहन विभाग की जांच में खुली पोल
वन विभाग ने जब वाहन में मिले एक पुराने PUC प्रमाण पत्र (यूके08पीए 0061) के आधार पर आरटीओ से जानकारी जुटाई, तो सच सामने आया:
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असली मालिक की गवाही: वाहन के वास्तविक स्वामी शिशपाल ने बताया कि उन्होंने यह गाड़ी 30 सितंबर 2024 को रवि भट्ट (निवासी कुसुमखेड़ा) को ₹1.50 लाख में बेची थी।
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दस्तावेजों में हेराफेरी: रवि भट्ट ने वाहन को अपने नाम ट्रांसफर नहीं कराया था और उसका टैक्स भी नवंबर 2024 में खत्म हो चुका था। तस्करी को अंजाम देने के लिए उसने वाहन की पहचान मिटाने की कोशिश की।
3. आरोपित रवि भट्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई
उप प्रभागीय वनाधिकारी गणेश दत्त जोशी की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि रवि भट्ट ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से वन संपदा की चोरी के लिए फर्जीवाड़ा किया।
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नोटिस की अनदेखी: विभाग ने रवि भट्ट को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।
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प्राथमिकी दर्ज: जांच में संलिप्तता स्पष्ट होने के बाद, वन विभाग की संस्तुति पर काठगोदाम थाना पुलिस ने रवि भट्ट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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