हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जो समाज और परिवारों के लिए एक बड़ा सबक है। जीवन के सांध्यकाल में अपनों की अनदेखी और मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) के चलते एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने गौला बैराज में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास किया।
जल पुलिस की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों के सहयोग से एक बड़ा अनर्थ होने से टल गया। यहाँ इस भावनात्मक और प्रेरणादायक रेस्क्यू का विवरण दिया गया है:
काठगोदाम/हल्द्वानी (4 अप्रैल 2026): पुलिस की तत्परता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खाकी केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण भी है।
1. घटना का घटनाक्रम: मौत की छलांग और देवदूत बनकर पहुंची पुलिस
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तारीख और समय: 3 अप्रैल 2026।
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सूचना: कॉलर दीपक भंडारी ने हेड कांस्टेबल प्रताप गड़िया (जल पुलिस) को सूचना दी कि एक व्यक्ति ने काठगोदाम स्थित गौला बैराज में छलांग लगा दी है।
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त्वरित कार्रवाई: सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल प्रताप गड़िया अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए मौके पर पहुँचे और स्थानीय लोगों की मदद से गहरे पानी से बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाला।
2. पहचान और पारिवारिक स्थिति
रेस्क्यू के बाद की गई पूछताछ में बुजुर्ग की पहचान इस प्रकार हुई:
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नाम: मोहन चन्द्र उपाध्याय (80 वर्ष)
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निवासी: गंगाविहार, कुसुमखेड़ा (हल्द्वानी)
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वजह: पुलिस को पता चला कि बुजुर्ग डिप्रेशन (अवसाद) से ग्रसित हैं और उनका मानसिक उपचार चल रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर भावनात्मक अकेलापन या छोटी-छोटी बातें भी बुजुर्गों के मन को गहरा आघात पहुँचा सकती हैं।
3. परिजनों को सुपुर्दगी: भावुक हुए चेहरे
पुलिस द्वारा सूचना देने पर बुजुर्ग के पुत्र यत्तीश उपाध्याय (45 वर्ष) और ममता उपाध्याय (37 वर्ष) मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए मोहन चन्द्र जी को उनके परिजनों के सुपुर्द किया। परिजनों ने पुलिस की इस तत्परता के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
पुलिस की सराहना: हेड कांस्टेबल प्रताप गड़िया और उनकी टीम की सजगता ने आज हल्द्वानी के एक परिवार को उजड़ने से बचा लिया। काठगोदाम पुलिस का यह कार्य ‘मित्र पुलिस’ की छवि को और मजबूत करता है।
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