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डेनिस रावत’ पर हरदा का पलटवार—सुबोध को दिया नया नाम, “अब आप हिलटॉप के अंकल बनिए!”

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राजू अनेजा,देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के ‘डेनिस रावत’ वाले तंज का अपने अंदाज में जवाब दिया है। रावत ने कहा कि अगर उन्हें ‘डेनिस रावत’ कहा जा रहा है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं, लेकिन सवाल यह है कि जिस नीति के तहत उत्तराखंड के फल और सब्जियों को शराब उद्योग से जोड़ने की कोशिश की गई थी, उसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया।

‘डेनिस रावत’ कहने पर कोई ऐतराज नहीं—हरदा

हरीश रावत ने कहा कि उस समय सरकार ने ऐसी नीति बनाई थी, जिसके तहत शराब निर्माता कंपनियों को उत्तराखंड के फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने पर उनकी शराब की बिक्री में 20 प्रतिशत तक मार्केटिंग राइट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने की व्यवस्था थी।

उनके मुताबिक कंपनियों को मंडियों से खरीदे गए फल और सब्जियों की रसीदें प्रस्तुत करनी होती थीं। आबकारी विभाग इसकी जांच करता था और निर्धारित प्रक्रिया के बाद संबंधित कंपनियों को बाजार में प्राथमिकता मिलती थी।

रावत ने कहा कि यदि उस नीति को पूरी तरह लागू किया जाता तो आज उत्तराखंड का हॉर्टिकल्चर और सब्जी उत्पादन कहीं आगे होता। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि यह व्यवस्था उस स्तर तक नहीं पहुंच सकी, जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया था।

‘डेनिस’ आज भी बाजार में है, फिर धामी का क्या नाम रखेंगे?

 

हरदा ने इसके बाद अपने अंदाज में राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह भले ही ‘डेनिस रावत’ हैं, लेकिन आज डेनिस बाजार में भी उपलब्ध है और आर्मी कैंटीनों में भी इसकी बिक्री होती है।

यहीं से उन्होंने सुबोध उनियाल को घेरते हुए सवाल उछाल दिया कि अगर किसी शराब ब्रांड के नाम से किसी नेता को संबोधित किया जा सकता है तो फिर आज सरकार में मौजूद लोगों को किन-किन नामों से पुकारा जाएगा?

हिलटॉप, गुलाब, काफल और माल्टा तक पहुंचा तंज

 

रावत ने कहा कि उत्तराखंड में शराब के कई ब्रांड ऐसे हैं, जिनके नाम प्रदेश के फल और पहाड़ की पहचान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने हिलटॉप, गुलाब, काफल और माल्टा जैसे नाम गिनाते हुए सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर उत्तराखंड के फल-फूलों के नाम पर शराब की डिस्टिलरी और ब्रांड चल रहे हैं तो फिर अकेले किसी एक व्यक्ति को ‘अंकल’ कहने से काम नहीं चलेगा।

“मिस्टर सुबोध अंकल, आप हिलटॉप के अंकल बनो”

 

हरदा ने सुबोध उनियाल को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा—

“कोई माल्टे के अंकल हो जाए, कोई काफल के अंकल हो जाए… मिस्टर सुबोध अंकल, मेरी राय है आप हिलटॉप के अंकल बनो।”

उन्होंने हिलटॉप की फैक्ट्री का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्रनगर से आगे गंगा के ऊपर इसकी फैक्ट्री लगी है और इसे भी सरकार की ओर से राज्य को दी गई देन के रूप में देखा जाना चाहिए।

एक तंज से खुली शराब नीति पर सियासी बहस

 

हरदा के इस पलटवार ने ‘डेनिस रावत’ वाली टिप्पणी को महज राजनीतिक तंज से आगे बढ़ाकर उत्तराखंड की शराब नीति, स्थानीय फल-सब्जियों के इस्तेमाल और बागवानी को बढ़ावा देने की नीति से जोड़ दिया है।

एक तरफ सुबोध उनियाल की ओर से हरीश रावत को ‘डेनिस रावत’ कहकर निशाना साधा गया, तो दूसरी तरफ हरदा ने उसी तंज को पलटते हुए ‘हिलटॉप के अंकल’ वाला नया राजनीतिक जुमला सामने रख दिया।

अब देखना यह है कि हरदा के इस ‘अंकल पॉलिटिक्स’ वाले पलटवार पर सुबोध उनियाल की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है।

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