हिमालय प्रहरी

हरदा का ‘अर्जित अवकाश’ खत्म; कुमारी सैलजा से मुलाकात के बाद अब ‘उत्तराखंडियत’ की तलाश में निकलेंगे हरीश रावत, हार के कारणों पर जनता से मांगेंगे जवाब

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उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में पिछले कुछ दिनों से चल रहा ‘अर्जित अवकाश’ का हाई-वोल्टेज ड्रामा अब सुलझता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) ने अपना मौन तोड़ते हुए न केवल प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की, बल्कि अपनी अगली राजनीतिक पारी का ‘रोडमैप’ भी साफ कर दिया है।

यहाँ इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:

देहरादून (12 अप्रैल 2026): रामनगर के नेता संजय नेगी को पार्टी में शामिल न किए जाने से नाराज होकर 15 दिन के अवकाश पर गए हरीश रावत शनिवार को सार्वजनिक रूप से सक्रिय हुए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के आवास पर हुई यह बैठक गुटबाजी में फंसी कांग्रेस के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ मानी जा रही है।

1. ‘मेल-मिलाप’ की बैठक: पर्दे के पीछे की कहानी

  • सूत्रधार: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने दोनों धड़ों के बीच सेतु का काम किया। उनकी मध्यस्थता के बाद ही हरदा कुमारी सैलजा से मिलने को राजी हुए।

  • उपस्थिति: इस बैठक में हरदा और सैलजा के अलावा प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत और भुवन कापड़ी जैसे दिग्गज मौजूद रहे।

  • हरदा का रुख: मुलाकात के बाद रावत ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ गुलदस्ता भेंट किया है, अपनी बात तो वह पहले ही हाईकमान (दिल्ली) तक पहुँचा चुके हैं।

2. ‘अर्जित अवकाश’ पर हरदा की सफाई

रावत ने अपने 15 दिन के अवकाश को एक ‘व्यक्तिगत निर्णय’ बताया। उन्होंने कहा कि:

  • यह मन की शांति के लिए लिया गया ब्रेक था।

  • इस दौरान हुई बयानबाजी और टिप्पणियों ने उन्हें विचलित नहीं किया।

  • असली सवाल यह है कि 2017 और 2022 में कांग्रेस की हार क्यों हुई, और इसका जवाब ढूंढना जरूरी है।

3. ‘उत्तराखंडियत’ बनाम ‘हिंदुत्व आधारित राष्ट्रवाद’

हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि भाजपा के राष्ट्रवाद का मुकाबला करने के लिए वह स्थानीय संस्कृति और उत्तराखंडियत को मजबूत करेंगे। हार का असली कारण जानने के लिए वह अब पूरे प्रदेश का व्यापक भ्रमण करेंगे।

4. हरदा का आगामी दौरा कार्यक्रम (Mission 2026-27)

हरीश रावत ने अपनी यात्रा का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है:

  • 15 अप्रैल: उत्तरकाशी (गंगोत्री राजमार्ग और धराली)।

  • 20 अप्रैल: थराली और कनलगढ़।

  • धार्मिक यात्रा: अपने पैतृक गांव मोहनारी जाकर ग्वेल देवता और ईष्ट देवता का आशीर्वाद लेंगे।

  • हरिद्वार: अपने मुख्य कर्मक्षेत्र हरिद्वार का भी सघन दौरा करेंगे।

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