उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस में ‘वर्चस्व की जंग’ एक बार फिर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की कथित उपेक्षा और उनके द्वारा 15 दिन के ‘अर्जित अवकाश’ की घोषणा ने पार्टी के भीतर गुटीय कलह को चरम पर पहुँचा दिया है।
यहाँ इस राजनीतिक घटनाक्रम का विस्तृत विश्लेषण और मुख्य विवाद बिंदु दिए गए हैं:
देहरादून/दिल्ली (3 अप्रैल 2026): दिल्ली में हाल ही में हुई जॉइनिंग और रामनगर के नेता संजय नेगी के प्रवेश को रोकने के बाद कांग्रेस के भीतर खेमेबाजी खुलकर सामने आ गई है।
1. विवाद की जड़: संजय नेगी की जॉइनिंग और दिल्ली का कार्यक्रम
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उपेक्षा का आरोप: 28 मार्च को दिल्ली में तीन पूर्व विधायकों सहित 6 नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया, लेकिन इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से हरीश रावत नदारद रहे।
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संजय नेगी प्रकरण: हरीश रावत रामनगर के निर्दलीय नेता संजय नेगी को कांग्रेस में लाने की पैरवी कर रहे थे, जिसे पार्टी हाईकमान ने फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
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रावत का तंज: अपनी बात न माने जाने से आहत रावत ने सोशल मीडिया पर 15 दिन के ‘अर्जित अवकाश’ (विश्राम) पर जाने की घोषणा कर तंज कसा।
2. हरक सिंह बनाम हरीश धामी: 2016 की बगावत की यादें ताजा
चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है:
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हरक सिंह का बयान: “किसी को घमंड नहीं होना चाहिए कि उसके बिना पार्टी खत्म हो जाएगी। अगर कोई विश्राम चाहता है तो किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।”
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हरीश धामी का पलटवार: धारचूला विधायक हरीश धामी ने हरक सिंह को 2016 का ‘महापापी’ बताते हुए कहा कि जिन्होंने कांग्रेस सरकार गिराई, वे आज वफादारी का पाठ पढ़ा रहे हैं। धामी ने रावत के सम्मान में सामूहिक इस्तीफे तक की पेशकश कर दी है।
3. रणजीत रावत का तीखा हमला
पूर्व विधायक रणजीत रावत ने गुटीय जंग को और हवा देते हुए हरीश रावत के नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए:
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उन्होंने कहा कि 2017 और 2022 के चुनाव हरीश रावत के नेतृत्व में लड़े गए और पार्टी की जो दुर्दशा हुई, वह सबके सामने है।
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रणजीत ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर एक नेता (हरीश रावत) की उपेक्षा का नैरेटिव सेट किया जाता है।
उत्तराखंड कांग्रेस का अंतर्कलह 2026
| मुख्य पात्र | स्टैंड / भूमिका |
| हरीश रावत | उपेक्षा से आहत, 15 दिन के अवकाश पर गए। |
| हरक सिंह रावत | रावत के विश्राम को सही बताया, ‘घमंड’ न करने की सलाह दी। |
| हरीश धामी | हरीश रावत के कट्टर समर्थक, इस्तीफे की पेशकश की। |
| रणजीत रावत | नेतृत्व पर सवाल उठाए, पिछले हारों का जिम्मेदार बताया। |
| कुमारी सैलजा | प्रदेश प्रभारी, 8 अप्रैल से 5 दिवसीय दौरे पर आ रही हैं। |
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