पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का दो दिवसीय उत्तरकाशी दौरा राज्य की राजनीति और आपदा प्रबंधन की चर्चाओं में गर्माहट ले आया है। आपदा प्रभावित धराली और भटवाड़ी क्षेत्रों का भ्रमण करने के बाद रावत ने वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
यहाँ उनके दौरे और सरकार के समक्ष रखी गई मांगों का मुख्य विवरण दिया गया है:
उत्तरकाशी/देहरादून (17 अप्रैल 2026): उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लौटने के बाद हरीश रावत ने सरकार को 2013 के ‘पुनर्निर्माण मॉडल’ से सीखने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी मानसून धराली के लिए घातक हो सकता है।
1. धराली में आपदा प्रभावितों का दर्द
हरीश रावत ने धराली के ग्रामीणों से मुलाकात की, जहाँ लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई:
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मुआवजे की कमी: ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें व्यावसायिक नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है।
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हाईवे एलाइनमेंट: स्थानीय लोग चाहते हैं कि गंगोत्री हाईवे का निर्माण पुराने एलाइनमेंट पर ही हो, क्योंकि उनकी संपत्तियां अभी भी मलबे में दबी हैं।
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आंदोलन की चेतावनी: ग्रामीणों ने प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी है, जिस पर रावत ने भरोसा दिलाया कि वह इन बिंदुओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।
2. हर्षिल की ‘झील’ और भटवाड़ी का ‘भू-धंसाव’
रावत ने हर्षिल और भटवाड़ी की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की:
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झील का खतरा: हर्षिल में बनी अस्थायी झील बरसात में बड़े खतरे का संकेत है। रावत ने कहा, “मैं यहाँ से चिंता और डर के साथ लौट रहा हूँ।”
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भटवाड़ी: भू-धंसाव से प्रभावित इस क्षेत्र के लिए उन्होंने तत्काल ठोस पुनर्वास नीति की मांग की।
3. चारधाम यात्रा और सरकार पर आरोप
चारधाम यात्रा शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है, जिसे लेकर रावत ने सरकार को घेरा:
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धीमी तैयारी: उन्होंने कहा कि जो कार्य यात्रा से 15 दिन पहले पूरे हो जाने चाहिए थे, वे अभी भी अधूरे हैं।
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विफलता का आरोप: रावत ने कहा कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रभावितों का लोन माफ करे और सरकारी जमीन पर हुए नुकसान की भी भरपाई करे।
देहरादून पहुँचते ही आंदोलनकारियों को दिया समर्थन
उत्तरकाशी से सीधे देहरादून के एकता विहार पहुँचे हरीश रावत ने विभिन्न आंदोलनरत संगठनों के बीच पहुँचकर उनकी मांगों को जायज ठहराया:
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नर्सिंग एकता मंच: नर्सों की मांगों का समर्थन किया।
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PRD कर्मी: पीआरडी जवानों की समस्याओं पर चर्चा की।
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गैरसैंण: गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर अड़े आंदोलनकारियों के साथ खड़े दिखे।
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