बनबसा (चंपावत): चंपावत जिले के बनबसा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। छुट्टी पर घर आए सेना के हवलदार हरीश चंद का अचानक तबीयत बिगड़ने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से सीमांत गांव गड़ीगोठ सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
💔 शादी की खुशियों के बीच छाया मातम
हवलदार हरीश चंद (35 वर्ष) पिथौरागढ़ स्थित 12 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। उनकी असमय मृत्यु ने सबको झकझोर कर रख दिया है:
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छुट्टी पर आए थे घर: हरीश चंद अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 25 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। भाई की शादी 23 जनवरी को हुई थी, जिसमें उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
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अचानक बिगड़ी तबीयत: सोमवार, 9 फरवरी को तड़के 3 बजे अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी ही कर रहे थे कि उन्होंने दम तोड़ दिया।
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ड्यूटी पर लौटना था: उन्हें आगामी 17 फरवरी को वापस पिथौरागढ़ अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करना था, लेकिन उससे पहले ही होनी ने उन्हें छीन लिया।
🛡️ सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
आज यानी मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को बनबसा के शारदा घाट पर हवलदार हरीश चंद का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पूर्व सैनिकों ने जताया शोक: ‘गौरव सेनानी पूर्व सैनिक संगठन’ के अध्यक्ष रिटायर्ड कैप्टन भानी चंद व अन्य पूर्व सैनिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है।
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फौजी परिवार: हरीश तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई भी भारतीय सेना में (सिकंदराबाद) सेवाएं दे रहे हैं, जो इस दुखद खबर के बाद घर पहुँच रहे हैं।
👨👩👦 पीछे छोड़ गए मासूम बेटा और रोता परिवार
हरीश चंद साल 2010 में सेना में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे थे। उनके निधन से उनके परिवार की खुशियां उजड़ गई हैं:
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वे अपने पीछे पत्नी आशा चंद और महज 2 साल के बेटे कृष को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
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माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव का हर व्यक्ति इस फौजी परिवार को ढांढस बंधाने पहुँच रहा है।
श्रद्धांजलि: उत्तराखंड की सैन्य भूमि ने एक और वीर सपूत को खो दिया है। हवलदार हरीश चंद की देश सेवा और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
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