हिमालय प्रहरी

बिन्दुखत्ता राजस्व गांव पर हाईकोर्ट ने भी किये हाथ खड़े, लाखों उम्मीदों को करारा झटका

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राजू अनेजा,लालकुआ/नैनीताल।लाखों उम्मीदों का बोझ उठाए बिन्दुखत्ता एक बार फिर सिस्टम के सामने बेबस नजर आया। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया, जिससे करीब एक लाख की आबादी को बड़ा झटका लगा है।
चोरगलिया निवासी सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पोखरिया द्वारा दायर याचिका में साफ कहा गया था कि बिन्दुखत्ता में लंबे समय से भारी आबादी निवास कर रही है, लेकिन बुनियादी अधिकारों से लोग अब भी वंचित हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रदेश के दो-दो मुख्यमंत्रियों ने बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की घोषणा की, लेकिन 2 दिसंबर 2025 को की गई घोषणा को ही विलोपित कर दिया गया। इससे साफ है कि सियासी वादे कितने खोखले साबित हो रहे हैं।
याचिका में यह भी उठाया गया कि उत्तराखंड में करीब पांच लाख लोग आज भी वन क्षेत्रों और खत्तों में जीवन गुजार रहे हैं। वहीं हरिद्वार के चार गांवों और रामनगर के सुंदरखाल को राजस्व गांव का दर्जा मिल चुका है, लेकिन बिन्दुखत्ता अब भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
याचिकाकर्ता ने वन अधिकार कानून 2006 के तहत हल्द्वानी के दमुवादूंगा की तर्ज पर बिन्दुखत्ता को भी राजस्व गांव घोषित करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट से इस पर कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है,आखिर कब तक बिन्दुखत्ता के लोग सिर्फ घोषणाओं के सहारे जीते रहेंगे?
या फिर उनका हक यूं ही फाइलों और सियासत के बीच दम तोड़ता रहेगा?

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