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उत्तराखंड में ऐतिहासिक बदलाव: मदरसा बोर्ड समाप्त, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू; CM धामी बोले- ‘यूसीसी की तरह वन नेशन वन एजुकेशन की शुरुआत’

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देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आधुनिक और समान बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश में 30 जून 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिसके स्थान पर 1 जुलाई 2026 से ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ (अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम) को लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में इस नए प्राधिकरण की आधिकारिक शुरुआत की और मान्यता प्राप्त करने वाले शुरुआती 9 अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (7 मदरसे, 1 सिख समुदाय स्कूल और 1 जैन समुदाय स्कूल) को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (UCC) के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की शुरुआत की थी, ठीक उसी तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उत्तराखंड से ही हो रही है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि यह प्राधिकरण देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य के हर वर्ग व समुदाय के बच्चे को अच्छी, संस्कार युक्त तथा आधुनिक शिक्षा सुनिश्चित करेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में संचालित सभी 452 पंजीकृत मदरसों के साथ-साथ अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अब अनिवार्य रूप से शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अब तक कुल 452 पंजीकृत मदरसों में से 158 मदरसों ने शिक्षा विभाग की मान्यता के लिए पोर्टल पर आवेदन किया है। विभाग द्वारा इन सभी आवेदनों का शिक्षा विभाग के तय मानकों के आधार पर ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ (भौतिक सत्यापन) किया जाएगा। जो मदरसे इन कड़े मानकों पर खरे उतरेंगे, केवल उन्हें ही मान्यता दी जाएगी। यदि कोई मदरसा मानकों को पूरा नहीं कर पाता है, तो उसे व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी। इसके बावजूद भी मानक पूरे न होने की स्थिति में संस्थान को शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, दोनों से मान्यता नहीं मिलेगी और तय नियमों के अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में मौजूद छह अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों की सहूलियत के लिए सरकार ने एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ (एकीकृत खिड़की प्रणाली) तैयार की है, जिसके माध्यम से ये संस्थान आसानी से आवेदन कर सकते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजानदास के निर्देशों के अनुसार, नई व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग के बीच निरंतर बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षण संस्थानों को भी मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है ताकि वहां पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक आधुनिक शिक्षा मिल सके।

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