हिमालय प्रहरी

मानवता शर्मसार; जवान बेटी की चिता जलाने के लिए 4 घंटे संघर्ष, टायर और डीजल का लेना पड़ा सहारा

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श्रीनगर गढ़वाल के अलकेश्वर घाट से सामने आई यह घटना न केवल व्यवस्थाओं की पोल खोलती है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के मर जाने का एक डरावना उदाहरण भी पेश करती है। एक ओर 19 साल की जवान बेटी को खोने का गम और दूसरी ओर उसके अंतिम संस्कार के लिए परिजनों का दर-दर भटकना, स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यहाँ इस हृदयविदारक घटना का विस्तृत विवरण दिया गया है:

श्रीनगर गढ़वाल (6 अप्रैल 2026): अलकेश्वर घाट पर एक दुखी परिवार को अपनी बेटी के अंतिम संस्कार के लिए जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, उसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सरकारी अव्यवस्था और निजी टाल संचालकों की संवेदनहीनता के कारण शव को मोक्ष देने के लिए परिजनों को ‘अमानवीय’ जतन करने पड़े।

1. घटना का क्रम: गमगीन परिवार की बेबसी

  • अंतिम यात्रा: श्रीनगर का एक परिवार अपनी 19 वर्षीय बेटी के पार्थिव शरीर को लेकर अंतिम संस्कार के लिए अलकेश्वर घाट पहुँचा।

  • लकड़ी का अभाव: घाट पर सरकारी स्तर पर ईंधन (लकड़ी) की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण परिजनों को एक निजी टाल से लकड़ियां खरीदनी पड़ीं।

  • गीली लकड़ियों का धोखा: परिवार का आरोप है कि टाल संचालक ने उन्हें भारी कीमत पर गीली और कच्ची लकड़ियां थमा दीं। भारी मन से चिता सजाई गई, लेकिन लकड़ियां गीली होने के कारण चिता जल ही नहीं पाई।

2. टायर, डीजल और स्कूल बैग की दी गई आहुति

संवेदनाएं तब और तार-तार हो गईं जब चिता को प्रज्वलित करने के लिए परिवार को विवश होकर ये कदम उठाने पड़े:

  • अमानवीय प्रयास: करीब 4 घंटे तक चिता न जलने पर परिजनों ने 15 लीटर डीजल, पुराने टायर और गद्दों का इस्तेमाल किया।

  • आखरी यादें स्वाहा: चिता की आग तेज करने के लिए मृतका के निजी सामान, उसके कपड़े, जूते और यहाँ तक कि स्कूल बैग को भी चिता में डालना पड़ा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

3. स्थानीय आक्रोश और राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद श्रीनगर में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोक्ष धाम जैसे संवेदनशील स्थान पर बुनियादी सुविधाओं का न होना प्रशासन की बड़ी विफलता है।

  • शुभम प्रभाकर (वार्ड पार्षद): उन्होंने इस मामले को नगर निगम के समक्ष उठाते हुए जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • आरती भंडारी (मेयर, श्रीनगर): मेयर ने स्वीकार किया कि टाल एक निजी व्यक्ति द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा, “मामला संज्ञान में आते ही टाल संचालक को नोटिस जारी कर दिया गया है। वन विभाग से समन्वय कर संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

4. व्यवस्था पर सवाल

यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है:

  1. क्या नगर निगम के पास घाटों पर सूखी लकड़ियों का कोई इमरजेंसी बैकअप नहीं होना चाहिए?

  2. निजी टाल संचालकों की मनमानी और गीली लकड़ियां बेचने पर किसकी जवाबदेही तय होगी?

  3. क्या किसी मृत आत्मा की विदाई के समय भी ‘मुनाफाखोरी’ ही प्राथमिकता रहेगी?

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