
राजू अनेजा,रुद्रपुर।पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ के पुत्र एवं आवास विकास रुद्रपुर के पार्षद सौरभ राज बेहड़ पर हुए जानलेवा हमले ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यह महज एक आपराधिक घटना थी या फिर सोची-समझी राजनीतिक साजिश, इस सवाल ने गलियारों से लेकर आमजन तक चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
बताया जा रहा है कि बीते कुछ समय से पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ और उनके पुत्र को लेकर लगातार माहौल बनाया जा रहा था। सोशल चर्चाओं, राजनीतिक तंज और परोक्ष हमलों के बीच अचानक हुआ यह हमला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या राजनीतिक सक्रियता बनी वजह?
स्वस्थ होने के बाद पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ हाल के दिनों में पूरी फॉर्म में नजर आ रहे हैं। संगठन से लेकर जनता के बीच उनकी सक्रियता, विकास कार्यों की तेज रफ्तार और जमीनी पकड़ ने उन्हें एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला खड़ा किया है।सूत्रों की मानें तो उनकी बढ़ती सक्रियता से विरोधी खेमे में बेचैनी साफ देखी जा रही है।
2027 की तैयारी या डर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तिलक राज बेहड़ पूरी तरह एक्टिव मोड में हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है—
क्या यह हमला उभरते राजनीतिक विजय रथ को रोकने की कोशिश है?
क्या विरोधियों ने राजनीतिक लाभ के लिए हिंसा का रास्ता चुना?
जांच के घेरे में कई एंगल
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को अपराध की दृष्टि से जांच रही है, लेकिन जिस तरह से हमले का तरीका, समय और टारगेट सामने आया है, उसने राजनीतिक साजिश की आशंका को और गहरा कर दिया है।
सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और पुराने विवाद—हर एंगल पर जांच जरूरी मानी जा रही है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं-
क्या यह हमला महज संयोग है या रणनीति?
क्या राजनीतिक दबदबे से घबराए विरोधियों ने हदें पार कीं?
क्या 2027 से पहले उत्तराखंड की राजनीति में हिंसा का नया अध्याय खुल रहा है?
फिलहाल जवाब जांच के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि पार्षद सौरभ बेहड़ पर हमला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संकेतों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है।
सच क्या है—यह आने वाले दिनों में जांच ही तय करेगी।
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