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जल जीवन मिशन: उत्तराखंड को मिलेंगे ₹3500 करोड़; 2028 तक हर घर को शुद्ध पानी का लक्ष्य

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उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों के लिए केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन (JJM) एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने वाला है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस मिशन के लिए 67,670 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान और इसकी समय सीमा को वर्ष 2028 तक बढ़ाए जाने से राज्य की पेयजल समस्याओं के समाधान की उम्मीदें पुख्ता हो गई हैं।

यहाँ इस योजना से उत्तराखंड को होने वाले लाभों का मुख्य विवरण दिया गया है:

उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए मिशन की अवधि बढ़ना एक बड़ी राहत है।

📊 अब तक की प्रगति और नए लक्ष्य

  • संयोजन (Connections): राज्य के 14,979 गांवों के कुल 14,48,373 घरों में से अब तक 97.92% घरों को नल से जोड़ दिया गया है।

  • बकाया राशि: केंद्र से राज्य को अभी 3,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि मिलनी है, जो बजट प्रावधान के बाद अब जल्द रिलीज होने की उम्मीद है।

  • विस्तार: समय सीमा बढ़ने से अब उन दूरस्थ गांवों और नई बसावटों (Hamlets) को भी पाइपलाइन से जोड़ा जा सकेगा, जो पहले सर्वे से छूट गए थे।


💡 बजट 2026 से क्या बदलेगा?

  1. अधूरे प्रोजेक्ट्स में तेजी: 3500 करोड़ की लंबित राशि मिलने से उन पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा जो बजट की कमी से सुस्त पड़ गई थीं।

  2. रखरखाव (Maintenance): बजट का एक हिस्सा योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए भी उपयोग किया जाएगा, जिससे पाइपलाइनों और टैंकों का ढांचा लंबे समय तक सशक्त बना रहे।

  3. अतिरिक्त सहायता: 2028 तक विस्तारित अवधि के लिए राज्य को वार्षिक बजट के अलावा अतिरिक्त केंद्रीय सहायता (Additional Central Assistance) भी प्राप्त होगी।


🏔️ पहाड़ की चुनौतियों का समाधान

उत्तराखंड के कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्रोतों के सूखने और पाइप बिछाने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों के कारण मिशन को समय पर पूरा करना एक चुनौती थी।

  • नई तकनीक: बजट का उपयोग अब सौर ऊर्जा आधारित पंपिंग योजनाओं (Solar Pumping Schemes) और बेहतर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने में किया जा सकेगा।

  • ग्रामीण विकास: पेयजल की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं के सिर से पानी का बोझ कम होगा और पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।

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