
राजू अनेजा,काशीपुर।पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाला काशीपुर जंक्शन लगातार रेलवे मंत्रालय की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। लंबे समय से काशीपुर को एक भी नई लंबी दूरी की ट्रेन नहीं दी गई, उल्टा पहले से संचालित कई गाड़ियों को बंद कर दिया गया। स्थिति यह है कि जहां लालकुआं जंक्शन से नई-नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा रहा है, वहीं औद्योगिक नगरी काशीपुर और प्रमुख पर्यटन स्थल रामनगर को रेल कनेक्टिविटी से लगभग बाहर कर दिया गया है।
इस मुद्दे को लेकर श्रीठाकुर महासभा एकता मंच, काशीपुर ने पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल को पत्र भेजकर काशीपुर से जम्मूतवी, चंडीगढ़–अमृतसर, देहरादून और लखनऊ के लिए नई लंबी दूरी की ट्रेनों का शीघ्र संचालन शुरू करने की मांग की है। मंच ने यह भी मांग उठाई है कि काशीपुर जंक्शन को लालकुआं जंक्शन से लिंक ट्रेनों के माध्यम से जोड़ा जाए और लालकुआं से मुरादाबाद होकर चलने वाली कुछ गाड़ियों का संचालन वाया काशीपुर किया जाए।
पत्र में यह भी कहा गया है कि रामनगर–काशीपुर जंक्शन से सुबह 5 से 6 बजे के बीच मुरादाबाद के लिए एक नियमित ट्रेन चलाई जाए, ताकि यात्री मुरादाबाद से प्रातः चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को समय पर पकड़ सकें।
मंच के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि रेलवे मंत्रालय ने कुछ समय पूर्व लालकुआं–चंडीगढ़ वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव दिया था, जिसका रूट और पासिंग भी तय हो चुकी थी, लेकिन आज तक उस ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
मांग करने वालों में मंच के संरक्षक जितेंद्र सरस्वती, अध्यक्ष अजय कुमार, महासचिव नीरज ठाकुर के अलावा विकास, दीपक कुमार और पवन ठाकुर शामिल हैं।
आख़िर काशीपुर के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि काशीपुर एक ओर हजारों श्रमिकों वाली औद्योगिक नगरी है, वहीं रामनगर कॉर्बेट नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार होने के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है। इसके बावजूद रेलवे विस्तार की जरूरत को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
सवाल यह उठ रहा है कि बार-बार पत्राचार के बावजूद काशीपुर–रामनगर की आवाज रेलवे प्रशासन तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रही? क्या यहां के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को मजबूती से नहीं उठा पा रहे, या फिर इस क्षेत्र को जानबूझकर हाशिये पर रखा जा रहा है?
श्रमिकों के लिए घर जाना बन गया संघर्ष, छुट्टी कम सफर ज्यादा
रेल सुविधाओं के अभाव का सबसे बड़ा असर फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ रहा है। काशीपुर की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों को मजबूरी में पहले मुरादाबाद, दिल्ली, लखनऊ या काठगोदाम तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है। वहां से दूसरी ट्रेन पकड़नी होती है।
इस कारण सामान्य यात्रा भी 24 से 36 घंटे तक खिंच जाती है, जबकि किराया भी काफी बढ़ जाता है। त्योहार, बीमारी या किसी आपात स्थिति में यह परेशानी और भी विकराल हो जाती है।
श्रमिकों का कहना है कि चार दिन की छुट्टी मिलती है, लेकिन दो दिन तो आने-जाने में ही खत्म हो जाते हैं। अगर काशीपुर से सीधी ट्रेन होती, तो परिवार के साथ ठीक से वक्त बिता पाते।”
विकास पर ब्रेक
स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही काशीपुर और रामनगर को लंबी दूरी की सीधी रेल सेवाओं से नहीं जोड़ा गया, तो इसका सीधा असर उद्योग, पर्यटन और रोजगार पर पड़ेगा।
जनता का सवाल: जब लालकुआं को रेल सौगातें मिल रही हैं, तो काशीपुर–रामनगर को कब मिलेगी विकास की ट्रेन?