हिमालय प्रहरी

युद्ध की आंच में फंसा काशीपुर का बासमती निर्यात, कंटेनर अटके तो उद्योगपति-किसान दोनों संकट में

खबर शेयर करें -


राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर से अफ्रीका, अमेरिका, पश्चिम एशिया और कई यूरोपीय देशों तक पहुंचने वाला बासमती चावल इन दिनों अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते बड़ी मुश्किल में फंस गया है। समुद्री मार्गों और बंदरगाहों पर निर्यात के कंटेनर अटक जाने से काशीपुर के राइस उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसका सीधा असर उद्योगपतियों के साथ-साथ उन किसानों पर भी पड़ रहा है, जिनकी आजीविका बासमती की खेती पर टिकी है।
जानकारी के अनुसार काशीपुर से प्रतिदिन करीब तीन हजार क्विंटल बासमती चावल विदेशों को निर्यात होता है, जो महीने में लगभग 30 हजार क्विंटल तक पहुंच जाता है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निर्यात के कंटेनर समुद्र और विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे पड़े हैं, जिससे चावल की खेप आगे नहीं बढ़ पा रही है।

निर्यात लागत में 500 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल

राइस उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि कंटेनरों की कमी और निर्यात में आई रुकावट के कारण लागत तेजी से बढ़ गई है।
महिमा राइस इंडस्ट्रीज के रुचिन शर्मा और गुरु रामदास राइस मिल के संचालक रिंकू गोल्डी के अनुसार, कंटेनर अटकने से अब निर्यात करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हो गया है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ गई है और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।

चावल खराब होने का भी सता रहा डर

उद्योगपतियों का कहना है कि काशीपुर की करीब पांच से सात राइस इंडस्ट्रीज नियमित रूप से बासमती चावल का निर्यात करती हैं। लेकिन फिलहाल राइस मिलों में तैयार चावल पड़ा है और उसे भेजने के लिए कंटेनर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। यदि यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहती है तो चावल के खराब होने का खतरा भी बढ़ जाएगा, जिससे नुकसान और गहरा सकता है।

किसानों पर भी मंडराया आर्थिक संकट

बासमती की खेती करने वाले किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। निर्यात बाधित होने से बाजार में मांग प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने में मुश्किल आ सकती है।

उद्योग जगत ने जताई चिंता

केजीसीसीआई के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने कहा कि चावल का निर्यात लगभग ठप हो गया है और कंटेनरों की कमी ने राइस मिलरों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
उन्होंने कहा, “उद्योग के सामने लगातार नई समस्याएं खड़ी हो रही हैं। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।”
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से काशीपुर का बासमती निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर उद्योग, व्यापार और किसानों—तीनों पर गहराता नजर आ सकता है।

Exit mobile version