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काशीपुर का ‘चर्चित आरओबी’ बना अब स्थायी मरीज, हर बार मरम्मत का इंजेक्शन फिर भी बीमारी बरकरार! एक बार फिर 5 दिनों के लिए गंभीर अवस्था में ICU में भर्ती

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एक्सपेंशन जॉइंट के ‘ऑपरेशन’ के लिए 4 से 9 अक्टूबर तक बंद रहेगा फ्लाईओवर

मिस्त्री रूपी डॉक्टरों की टीम जुटी इलाज में, आरओबी बंद होते ही वाहनों के लिए लागू हुआ रूट डायवर्जन—शहर के सामने फिर जाम और यातायात का इम्तिहान

राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर के विकास और यातायात व्यवस्था की बड़ी उम्मीद के तौर पर तैयार किया गया महाराणा प्रताप चौक (MP Chowk) का चर्चित फ्लाईओवर/आरओबी एक बार फिर ‘अस्पताल’ पहुंच गया है। इस बार पुल को चार अक्टूबर से नौ अक्टूबर 2026 तक पांच दिनों के लिए यातायात के लिए बंद किया गया है। वजह बताई जा रही है फ्लाईओवर के एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत।

यानी करोड़ों की लागत से खड़ा हुआ आरओबी एक बार फिर गंभीर अवस्था में ICU में भर्ती है और उसे ‘चंगा’ करने के लिए मिस्त्री रूपी डॉक्टरों की टीम मैदान में उतर चुकी है।

सवाल यह नहीं कि पांच दिन बाद एक्सपेंशन जॉइंट ठीक हो जाएगा या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह आरओबी बार-बार मरम्मत के इंजेक्शन का मोहताज क्यों हो रहा है?

4 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक ‘ICU’ में रहेगा आरओबी

मरम्मत कार्य को देखते हुए 4 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक फ्लाईओवर पर यातायात बंद रहेगा। यानी पांच दिनों तक इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा।

फ्लाईओवर पर काम शुरू होते ही यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है।

अब शहर के सामने एक तरफ आरओबी की मरम्मत है तो दूसरी तरफ डायवर्ट किए गए यातायात को संभालने की चुनौती।

बीमारी इस बार ‘एक्सपेंशन जॉइंट’ की, लेकिन सवाल पुरानी बीमारी पर

इस बार आरओबी के एक्सपेंशन जॉइंट को ठीक करने का काम किया जा रहा है। पुल के लिए यह हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसकी खराबी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लेकिन सवाल यह है कि जब आरओबी पर पहले भी अलग-अलग हिस्सों में मरम्मत की जरूरत पड़ती रही है तो क्या हर बार केवल खराब हिस्से की मरम्मत पर्याप्त है?

या फिर जरूरत आरओबी की समग्र तकनीकी जांच की है?

शहर यही जानना चाहता है कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह है कि आरओबी को समय-समय पर ‘इलाज’ की जरूरत पड़ती रहती है।

उद्घाटन के महज 11 महीने बाद खुलने लगे थे ‘जोड़’

बाजपुर रोड पर तैयार इस आरओबी से शहरवासियों को काफी उम्मीदें थीं। माना गया था कि फ्लाईओवर शुरू होने के बाद यातायात सुगम होगा और जाम की समस्या कम होगी।

लेकिन शुरुआत के महज 11 महीने बाद ही जॉइंट उखड़ने और सिलेंडर नीचे गिरने जैसी घटनाओं ने लोगों का ध्यान इसकी मजबूती और रखरखाव की ओर खींचा।

इसके बाद समय-समय पर सरिया निकलने, जॉइंट स्लिप होने और सुरक्षा दीवार से जुड़ी समस्याओं जैसी स्थितियां भी चर्चा में आती रही हैं।

अब एक बार फिर एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत के लिए पुल को पांच दिन के लिए बंद किया गया है।

हर बार मरम्मत का इंजेक्शन, बीमारी फिर क्यों लौट आती है?

आरओबी की सबसे बड़ी कहानी यही है—खराबी सामने आई, मरम्मत हुई और कुछ समय बाद फिर कोई नया हिस्सा इलाज मांगने लगा।

ऐसे में शहर का सवाल बिल्कुल सीधा है—

क्या आरओबी का स्थायी इलाज होगा या मरम्मत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

क्या पुल की डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री की विशेषज्ञों से व्यापक जांच कराई गई है?

क्या पहले हुई मरम्मत के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि समस्या दोबारा न आए?

इन सवालों के जवाब अब इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि प्रत्येक मरम्मत के साथ यातायात प्रभावित होता है और आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ती है।

पांच दिन आरओबी बंद, अब डायवर्जन से गुजरेगा शहर

फ्लाईओवर बंद होने के बाद संबंधित मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है।

इसका मतलब साफ है—आरओबी पर चलने वाले वाहनों को अब वैकल्पिक मार्गों से जाना होगा।

ऐसे में अगले पांच दिन शहर की यातायात व्यवस्था के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। खासकर पीक आवर्स में यदि डायवर्जन वाले मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ता है तो जाम की स्थिति बन सकती है।

आरओबी की मरम्मत होगी, लेकिन असली परीक्षा शहर की यातायात व्यवस्था की होगी।

जिस पुल से जाम हटना था, वही फिर जाम की वजह बनने की स्थिति में

आरओबी का उद्देश्य यातायात को आसान बनाना था। लेकिन जब उसी आरओबी को पांच दिनों के लिए बंद करना पड़े तो स्वाभाविक रूप से आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ेगा।

वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों पर जाएंगे और शहर की सड़कों को अतिरिक्त यातायात का सामना करना पड़ेगा।

यही वजह है कि लोग अब केवल यह नहीं देख रहे कि एक्सपेंशन जॉइंट कितनी जल्दी ठीक होता है, बल्कि यह भी देखेंगे कि पांच दिनों तक शहर की यातायात व्यवस्था किस तरह संभाली जाती है।

व्यापारियों के लिए भी पांच दिन की अग्निपरीक्षा

काशीपुर का व्यापारिक जीवन सुगम यातायात पर काफी निर्भर है। आरओबी बंद होने और रूट डायवर्जन लागू होने से बाजारों की ओर आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

यदि इन रास्तों पर यातायात का दबाव बढ़ता है तो ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

इसलिए व्यापारियों की नजर भी इस बात पर रहेगी कि डायवर्जन कितना प्रभावी रहता है और यातायात व्यवस्था कितनी सुचारु रहती है।

काशीपुर की खूबसूरती और विकास का सवाल भी बरकरार

एक बड़ा आरओबी किसी भी शहर के बुनियादी ढांचे और विकास की पहचान माना जाता है। लेकिन यदि उसी ढांचे पर बार-बार मरम्मत का काम चलता रहे तो उसकी छवि पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

शहरवासियों की अपेक्षा है कि आरओबी को केवल बार-बार मरम्मत करने के बजाय उसकी स्थायी तकनीकी मजबूती सुनिश्चित की जाए।

अब पांच दिन का ‘ऑपरेशन’, शहर पूछ रहा—अगली बार किस हिस्से का इलाज होगा?

फिलहाल मिस्त्री रूपी डॉक्टरों की टीम एक्सपेंशन जॉइंट के ‘ऑपरेशन’ में जुटी है।

4 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक आरओबी ICU में रहेगा। यातायात डायवर्ट रहेगा। वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों से गुजरना होगा और शहर को पांच दिनों तक इस मरम्मत का असर झेलना होगा।

लेकिन असली सवाल पांच दिन बाद सामने आएगा—

क्या इस बार आरओबी स्थायी रूप से चंगा होगा या फिर कुछ समय बाद बीमारी किसी नए हिस्से में दिखाई देगी?

काशीपुर को बार-बार ICU में भर्ती होने वाला आरओबी नहीं, मजबूत और भरोसेमंद यातायात व्यवस्था चाहिए।

क्योंकि शहर का सवाल अब सिर्फ एक एक्सपेंशन जॉइंट का नहीं है।

सवाल है—करोड़ों की लागत से बने इस चर्चित आरओबी का स्थायी इलाज आखिर कब होगा?

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