हिमालय प्रहरी

वेंटिलेटर पर काशीपुर की स्वास्थ्य सुविधाएं, 64 करोड़ का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल फाइलों में तोड़ रहा दम

खबर शेयर करें -

 

एक साल से शासन में अटकी है फाइल, 200 बेड की योजना सिमटकर 105 बेड तक पहुंची, फिर भी नहीं मिली मंजूरी

राजू अनेजा, काशीपुर। शहर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को नई जिंदगी देने का दावा करने वाला 64 करोड़ रुपये का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल अब खुद सरकारी फाइलों में दम तोड़ता नजर आ रहा है। करीब एक साल पहले शासन को भेजा गया प्रस्ताव आज भी मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इस बीच विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि केंद्र सरकार से मिली करीब 64 करोड़ रुपये की धनराशि वापस चली गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

मंत्री ने किया था ऐलान, जगी थी नई उम्मीद

30 सितंबर 2023 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, स्टाफ की भारी कमी और ट्रॉमा सेंटर का पूरा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंचने जैसी खामियों पर चिंता जताई गई थी। इसके बाद अस्पताल परिसर में 200 बेड का अत्याधुनिक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल बनाने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल प्रस्ताव तैयार कर शासन भेजने के निर्देश भी दिए गए थे।

64 करोड़ मिले, लेकिन 112 करोड़ के प्रस्ताव ने फंसा दिया मामला

मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से करीब 64 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पेयजल निर्माण निगम को सौंपी गई। निगम ने 200 बेड के अस्पताल के लिए करीब 112 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, लेकिन लागत अधिक होने के कारण मामला स्वीकृति की चौखट पार नहीं कर सका। फाइल महीनों तक विभागों और शासन के बीच घूमती रही।

फिर बदला प्लान, 200 की जगह 105 बेड का प्रस्ताव

 

बाद में निर्देश दिए गए कि उपलब्ध बजट के भीतर ही अस्पताल का नया प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसके बाद अक्टूबर 2025 में कार्यदायी संस्था ने 105 बेड के अस्पताल का करीब 69 करोड़ रुपये का संशोधित प्रस्ताव तैयार कर दोबारा शासन भेज दिया। लेकिन इस प्रस्ताव पर भी अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये की योजना आज भी कागजों तक सीमित है।
बजट लौटने की चर्चा से बढ़ी चिंता
स्वास्थ्य विभाग और निर्माण एजेंसी के बीच चल रही सुस्ती के कारण अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि केंद्र से प्राप्त धनराशि वापस हो चुकी है। यदि ऐसा हुआ तो काशीपुर को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने का सपना और लंबा खिंच सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मरीजों को अब भी बड़े शहरों की दौड़

मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल नहीं बनने का सबसे बड़ा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों, दुर्घटनाओं और जटिल ऑपरेशन के मामलों में आज भी लोगों को हल्द्वानी, रुद्रपुर, मुरादाबाद या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने से कई बार मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है।

क्या बोले सीएमओ

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि एनएचएम के माध्यम से मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के लिए करीब 64 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। अस्पताल निर्माण का प्रस्ताव दो बार मुख्यालय भेजा जा चुका है। फिलहाल शासन से कोई नई सूचना या स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

बड़ा सवाल

जब बजट मिला, घोषणा हुई और प्रस्ताव भी तैयार हो गया, तो आखिर काशीपुर के हिस्से का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल अब तक सरकारी फाइलों से बाहर क्यों नहीं निकल पाया?

Exit mobile version