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केदारनाथ धाम 2026: 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे कपाट; टी गंगाधर लिंग होंगे मुख्य पुजारी

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ऊखीमठ | 15 फरवरी, 2026: ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की शुभ तिथि का इंतजार आज समाप्त हो गया। शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में आयोजित धार्मिक समारोह में ज्योतिषीय गणना के बाद आधिकारिक घोषणा की गई कि बाबा केदार के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वृष लग्न में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।


📅 कपाट खुलने का पूरा कार्यक्रम

परंपरा के अनुसार, बाबा की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल से प्रस्थान कर विभिन्न पड़ावों से होते हुए केदारनाथ धाम पहुँचेगी:

  • घोषणा स्थल: ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ।

  • मुहूर्त: 22 अप्रैल, सुबह 8:00 बजे (वृष लग्न)।

  • मुख्य पुजारी: इस वर्ष टी गंगाधर लिंग को मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया है।


📋 श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने कुछ अनिवार्य नियम लागू किए हैं:

  • पंजीकरण (Registration): सभी भक्तों के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। हालांकि, इस बार दर्शनार्थियों की संख्या पर कोई सीमा (Cap) नहीं रखी गई है।

  • स्वास्थ्य जांच (Medical): गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में चिकित्सा केंद्रों पर फिटनेस प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए केवल स्वस्थ व्यक्तियों को ही आगे जाने की अनुमति मिलेगी।

  • परिवहन: जॉलीग्रांट हवाई अड्डा (निकटतम), हरिद्वार/ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और फिर गौरीकुंड तक सड़क मार्ग। गौरीकुंड से पैदल या हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध रहेगी।


🛠️ प्रशासनिक तैयारियां और सुविधाएं

यात्रा मार्ग पर हलचल तेज हो गई है और होटल-गेस्ट हाउसों की बुकिंग शुरू हो चुकी है:

  1. सुरक्षा: भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के लिए विशेष तकनीक और अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी।

  2. आवास: मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर रहने और खाने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का भरोसा दिया है।

  3. हेली सेवा: श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन हेलीकॉप्टर टिकटों की बुकिंग भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।


❄️ शीतकालीन प्रवास का महत्व

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस दौरान भगवान शिव की उत्सव मूर्ति को ऊखीमठ लाया जाता है, जहाँ उनकी पूजा होती है। अब 22 अप्रैल को विधि-विधान के साथ बाबा पुनः अपने धाम में विराजमान होंगे।


श्रद्धालुओं के लिए सलाह: यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का अपडेट जरूर लें और गर्म कपड़े व जरूरी दवाइयां साथ रखें।

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