
फोरलेन हाईवे और निर्माणाधीन सितारगंज मार्ग को पर्याप्त मानते हुए एनएचएआई ने वापस लिया डीपीआर का प्रस्ताव
राजू अनेजा, हल्द्वानी/बरेली। कुमाऊं को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से तेज और आधुनिक सड़क संपर्क देने के उद्देश्य से प्रस्तावित बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे परियोजना शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने का प्रस्ताव निरस्त कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बरेली और हल्द्वानी के बीच पहले से फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध है, जबकि उत्तराखंड से बेहतर संपर्क के लिए बरेली-सितारगंज हाईवे का निर्माण भी जारी है। ऐसे में नए एक्सप्रेसवे की आवश्यकता महसूस नहीं की गई।
पिछले वर्ष बरेली से हल्द्वानी तक एक्सप्रेसवे निर्माण की संभावना तलाशने के लिए सर्वे कराया गया था। इसके बाद दिल्ली की एक संस्था को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। माना जा रहा था कि यह परियोजना कुमाऊं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई गति देगी और उत्तराखंड आने-जाने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी। हालांकि बाद में परियोजना की उपयोगिता और व्यवहारिकता को लेकर हुई समीक्षा में अधिकारियों ने इसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।
अधिकारियों के अनुसार बरेली-हल्द्वानी मार्ग पर पहले से फोरलेन हाईवे संचालित है, जिससे यातायात की जरूरतें पूरी हो रही हैं। इसके अलावा बरेली-सितारगंज हाईवे का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। यह मार्ग उत्तराखंड से संपर्क को और अधिक मजबूत करेगा। इसी कारण एक्सप्रेसवे परियोजना पर आगे खर्च करना उचित नहीं माना गया।
इस बीच बरेली क्षेत्र को सड़क संपर्क के क्षेत्र में अन्य बड़ी परियोजनाओं का लाभ मिलने जा रहा है। बरेली-मथुरा हाईवे का चौड़ीकरण जारी है, जिससे राजस्थान की ओर आवागमन अधिक सुगम होगा। बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मिलने से मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा का समय घटेगा। वहीं गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जो बरेली होकर गुजरेगा और पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगा।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर अश्वनी चौहान ने बताया कि बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव पिछले वर्ष सामने आया था, लेकिन बाद में डीपीआर तैयार कराने का आदेश निरस्त कर दिया गया। संबंधित संस्था को भी पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया गया है कि अब इस परियोजना की डीपीआर तैयार नहीं कराई जाएगी।
क्या होता फायदा
यदि यह एक्सप्रेसवे बनता तो बरेली और हल्द्वानी के बीच यात्रा और अधिक तेज तथा सुविधाजनक हो सकती थी। पर्यटन, व्यापार और माल परिवहन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी। हालांकि एनएचएआई का मानना है कि मौजूदा और निर्माणाधीन सड़क परियोजनाएं इन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।
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