
राजू अनेजा, काशीपुर।जमीन के खेल में उजड़ा एक परिवार… पिता की मौत के बाद सहानुभूति के ढेर सारे शब्द मिले, लेकिन हकीकत में सहारा देर से पहुंचा। महीनों तक दर-दर भटकने के बाद अब जाकर प्रशासन की पहल से किसान सुखवंत सिंह के बेटे की पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ है। फीस माफी के फैसले ने टूटे परिवार को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन जख्म अब भी ताजा हैं।
ग्राम पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह ने जमीन खरीद-फरोख्त में करीब चार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से आहत होकर इसी साल जनवरी में आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में भूमाफिया और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल था। नेताओं, सामाजिक संगठनों और प्रशासन ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया था। सबसे अहम वादा था—इकलौते बेटे गुरसेज की पढ़ाई निशुल्क कराने का।
लेकिन समय बीतता गया और वादे जमीन पर उतरते नजर नहीं आए। गुरसेज, जो अलीगंज रोड स्थित एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कक्षा 9 का छात्र है, उसकी फीस माफी को लेकर परिवार लगातार प्रयास करता रहा। मां प्रदीप कौर पर अचानक पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी और बेटे के भविष्य की चिंता ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
जब परिवार की यह पीड़ा सामने आई, तब प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए स्कूल प्रबंधन को फीस माफ करने के निर्देश दिए। खंड शिक्षा अधिकारी डीके साहू ने भी पुष्टि की कि अब गुरसेज से कोई फीस नहीं ली जाएगी।
फीस माफी के इस फैसले के बाद परिवार ने कुछ राहत की सांस ली है। सुखवंत के भाई परविंदर सिंह और पत्नी प्रदीप कौर का कहना है कि आखिरकार प्रशासन ने उनकी गुहार सुन ली और बेटे की पढ़ाई का बोझ हल्का हुआ है।
न्याय की आस अब भी बाकी
हालांकि, परिवार का दर्द सिर्फ आर्थिक नहीं है। परिजनों का कहना है कि मामले की जांच पुलिस और एसआईटी कर रही है, लेकिन उन्हें अब भी न्याय का इंतजार है। उनका मानना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक सुखवंत की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
पेंशन से मिल सकता है स्थायी सहारा
प्रदीप कौर ने प्रशासन से पेंशन की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि बेटे की पढ़ाई के साथ-साथ घर के अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक स्थायी आर्थिक सहारा ही उनके जीवन को संभाल सकता है। प्रशासन ने पेंशन से जुड़े कागजात जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एक तरफ फीस माफी से मिली राहत है, तो दूसरी ओर अब भी अधूरा न्याय और भविष्य की चिंता…
यही है उस परिवार की सच्चाई, जिसे भू-माफियाओं ने तोड़ा और सिस्टम ने देर से ही सही, लेकिन अब थोड़ा सहारा दिया है।
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