हिमालय प्रहरी

अमर शहीद विकास कुमार को अंतिम विदाई; रामेश्वर घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा’ के नारों से गूँजा आसमान

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पिथौरागढ़ के वीर सपूत और भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांस नायक विकास कुमार का पार्थिव शरीर पांच दिनों के लंबे इंतजार के बाद आज उनके पैतृक गांव पहुँचा। सिक्किम की दुर्गम सीमाओं पर देश की रक्षा करते हुए हिमस्खलन (Avalanche) की चपेट में आने से शहीद हुए इस 27 वर्षीय जांबाज को आज पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

यहाँ इस भावुक और गर्व से भरे घटनाक्रम का विवरण दिया गया है:

पिथौरागढ़ (3 अप्रैल 2026): शहीद विकास कुमार का बलिदान न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

1. 5 दिन का लंबा इंतजार और वतन वापसी

  • हादसा: 29 मार्च 2026 को सिक्किम सीमा पर गश्त के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से विकास शहीद हो गए थे।

  • हवाई मार्ग से वापसी: शुक्रवार सुबह शहीद का पार्थिव देह दिल्ली से विशेष विमान के जरिए नैनी-सैनी एयरपोर्ट पहुँचा, जहाँ से सेना के विशेष वाहन द्वारा उन्हें उनके गांव गणकोट (सुकौली) लाया गया।

2. “इन्हें अस्पताल ले चलो”: पत्नी की बेबसी ने सबकी आँखें भिगोईं

घर के आँगन में जब तिरंगे में लिपटा ताबूत पहुँचा, तो दृश्य अत्यंत हृदयविदारक था:

  • पत्नी की करुण पुकार: शहीद की पत्नी प्रीति बेसुध होकर ताबूत से लिपट गईं। वह बार-बार रोते हुए कह रही थीं— “इन्हें अस्पताल ले चलो”, मानो उन्हें अब भी चमत्कार की उम्मीद हो।

  • मासूम बेटा: शहीद का 10 माह का बेटा ‘पृथ्विक’ इस बात से पूरी तरह अनजान था कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। विकास ने जून में बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने का वादा किया था।

  • माता-पिता का हाल: शहीद के बुजुर्ग माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, जिन्हें ढांढस बंधाने के लिए जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

3. अंतिम यात्रा: 40 किमी तक उमड़ा जनसैलाब

गणकोट से रामेश्वर घाट तक की 40 किलोमीटर की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए:

  • गूँजते नारे: “विकास कुमार अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा” जैसे नारों से पूरी घाटी गूँज उठी।

  • पुष्प वर्षा: रास्ते भर ग्रामीणों और युवाओं ने शहीद के वाहन पर पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

4. सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि

रामेश्वर घाट पर सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी:

  • मुखाग्नि: शहीद के बड़े भाई नीरज कुमार ने चिता को मुखाग्नि दी।

  • भाई की मांग: नीरज ने गर्व से कहा कि उनके भाई का सपना बचपन से ही फौज में जाने का था। उन्होंने मांग की कि गांव के प्रवेश द्वार और विद्यालय का नाम शहीद विकास के नाम पर रखा जाए ताकि उनकी वीरता सदैव अमर रहे।

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