हल्द्वानी (1 अप्रैल 2026): लामाचौड़ स्थित ‘वृंदावन ग्रीन’ आवास और यूके के वेस्ट मिडलैंड्स के बीच मंगलवार को एक डिजिटल सेतु बना, जिसने पहाड़ की परंपराओं को सात समंदर पार जीवंत कर दिया।
1. मुख्य आकर्षण: तकनीक और परंपरा का मेल
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डिजिटल पुरोहित: विष्णुपुरी हल्द्वानी निवासी पंडित भूपेन्द्र उपाध्याय ने हल्द्वानी से ही वीडियो कॉल के माध्यम से मंत्रोच्चार कर पूजा संपन्न कराई।
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पारंपरिक वेशभूषा: यूके के कोवेंट्री में रह रहे प्रसन्न पंत और पलक पंत के साथ नवजात की दादी गौरा पंत ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘पिछौड़ा’ पहनकर ऑनलाइन आशीर्वाद लिया, जो कुमाऊंनी संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।
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नामकरण: बालक का नाम विधि-विधान से ‘चार्विक पंत’ रखा गया।
2. यूके का ‘फायर अलार्म’ और हल्द्वानी का ‘हवन’
एक दिलचस्प चुनौती और उसका समाधान इस कार्यक्रम का विशेष हिस्सा रहा:
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चुनौती: यूके के घरों में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म लगे होने के कारण वहां अग्नि प्रज्ज्वलित कर हवन करना संभव नहीं था।
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समाधान: परंपरा का निर्वाह करने के लिए लामाचौड़ (हल्द्वानी) स्थित विनीत पंत और सांकी जोशी के घर पर ही हवन कुंड तैयार किया गया। पंडित जी ने यहाँ आहुतियां दिलवाईं और वहां स्क्रीन के माध्यम से परिवार इस पवित्र यज्ञ का साक्षी बना।
3. समय का प्रबंधन (Time Zone Management)
भारत और यूके के बीच 4:30 घंटे का समय अंतराल (Time Difference) होने के कारण, मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा गया। पूजा का शुभ समय भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे तय किया गया, ताकि दोनों देशों में परिवार के सदस्य आसानी से जुड़ सकें।
Snapshot: डिजिटल नामकरण संस्कार 2026
| विवरण | जानकारी |
| नवजात का नाम | चार्विक पंत |
| स्थान (विदेश) | कोवेंट्री, वोरविकशायर (United Kingdom) |
| स्थान (भारत) | लामाचौड़, हल्द्वानी (उत्तराखंड) |
| पुरोहित | पंडित भूपेन्द्र उपाध्याय |
| विशेषता | ऑनलाइन मंत्रोच्चार, पिछौड़ा वेशभूषा और ‘रिमोट’ हवन |
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