लालकुआं/बिंदुखत्ता (16 मार्च 2026): वनाधिकार समिति और पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता ने संयुक्त रूप से तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना अविलंब जारी की जाए।
1. वनाधिकार अधिनियम 2006 का आधार
समिति का कहना है कि बिंदुखत्ता के निवासी दशकों से इस भूमि पर बसे हुए हैं। अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत उन्हें भूमि पर मालिकाना हक और क्षेत्र को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलना उनका कानूनी अधिकार है।
2. पूर्व सैनिकों और निवासियों की एकजुटता
बिंदुखत्ता मुख्य रूप से पूर्व सैनिकों और सीमांत क्षेत्रों से आए परिवारों का निवास स्थान है। ज्ञापन में कहा गया है कि राजस्व ग्राम का दर्जा न मिलने के कारण क्षेत्र के विकास कार्यों और निवासियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं (जैसे बैंक लोन, भूमि हस्तांतरण आदि) में तकनीकी बाधाएं आती हैं।
3. ज्ञापन देने वाले प्रमुख प्रतिनिधि
तहसील कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपने वालों में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल रहे:
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प्रमुख नाम: उमेश भट्ट, सेवानिवृत्त कैप्टन खिलाफ सिंह दानू, सेवानिवृत्त कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कविराज धामी, सेवानिवृत्त कैप्टन इंदर सिंह पनेरी।
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अन्य सदस्य: एडवोकेट बलवंत बिष्ट, बीना जोशी, बलवंत संभल, नवीन जोशी, प्रकाश उत्तराखंडी, रणजीत सिंह गढ़िया, दीपक नेगी और खुशाल सिंह कोश्यारी।
Snapshot: बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम मांग
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य मांग | राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करना |
| कानूनी आधार | वनाधिकार अधिनियम 2006 (FRA 2006) |
| माध्यम | तहसीलदार लालकुआं के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन |
| संगठन | वनाधिकार समिति एवं पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता |
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