पिथौरागढ़ (धारचूला): सीमांत तहसील धारचूला के बलुवाकोट क्षेत्र में एक अनोखा और बेहद कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन देखने को मिला। यहाँ एक दुर्गम चट्टान पर पिछले तीन दिनों से फंसी बकरियों को बचाने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रस्सियों के सहारे चट्टान पर चढ़कर बेजुबानों की जान बचाई।
🐐 कैसे फंसी बकरियां?
पंथागांव के रौंझाड़ निवासी गोपाल दत्त भट्ट की छह बकरियां तीन दिन पहले चरते समय एक अति दुष्कर और सीधी खड़ी चट्टान पर चढ़ गई थीं। अमूमन बकरियां कुशल पर्वतारोही मानी जाती हैं, लेकिन इस 20 मीटर से अधिक ऊंची चट्टान की बनावट ऐसी थी कि बकरियां ऊपर तो चढ़ गईं, पर नीचे उतरने का रास्ता नहीं खोज सकीं।
⏳ 3 दिन का संघर्ष और रेस्क्यू
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ग्रामीणों के प्रयास: बकरी पालक और स्थानीय ग्रामीणों ने बकरियों को उतारने की बहुत कोशिश की, लेकिन चट्टान इतनी खतरनाक थी कि वहां तक पहुँचना नामुमकिन था।
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प्रशासनिक हस्तक्षेप: जिला पंचायत सदस्य दीप शिखा ऐरी और पूर्व सैनिक चंचल सिंह ऐरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धारचूला तहसील प्रशासन को सूचित किया। वन विभाग ने जरूरी उपकरण न होने के कारण हाथ खड़े कर दिए थे।
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SDRF की जांबाजी: सोमवार को राजस्व टीम के साथ एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची। जवानों ने रस्सियों (Repelling) के सहारे चट्टान पर चढ़कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
📊 रेस्क्यू का परिणाम
बेहद सावधानी से चलाए गए इस अभियान के बाद स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
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सुरक्षित बचाई गई: 03 बकरियां।
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दुखद मृत्यु: 02 बकरियां (चट्टान से फिसलकर गिरने के कारण)।
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लापता: 01 बकरी।
🙏 ग्रामीणों ने जताया आभार
तीन दिनों से भूखी-प्यासी तड़प रही अपनी बकरियों को सुरक्षित देख पशुपालक गोपाल दत्त भावुक हो गए। उन्होंने इस रेस्क्यू के लिए राजस्व टीम, एसडीआरएफ के जवानों, जिला पंचायत सदस्य और पूर्व सैनिक चंचल सिंह ऐरी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
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