
राजू अनेजा,लालकुआं। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गा पाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र हेमवती नंदन दुर्गापाल लगातार क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि दुर्गापाल की राह पर चलते हुए नंदन दुर्गापाल लालकुआं के रुके हुए विकास कार्यों को नई गति दे सकते हैं, जिससे क्षेत्र में विकास की उम्मीदें एक बार फिर जिंदा होती दिखाई दे रही हैं।
दुर्गापाल के कार्यकाल को आज भी याद करती है जनता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरिश्चंद्र दुर्गापाल के कार्यकाल में लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए थे। सड़क, शिक्षा, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट उनके प्रयासों से क्षेत्र तक पहुंचे। यही कारण है कि आज भी क्षेत्र की जनता उनके कार्यकाल को याद करती है और उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों की चर्चा होती रहती है।
विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी में नंदन
अब उनके पुत्र हेमवती नंदन दुर्गापाल उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी उन्हें लालकुआं सीट से एक मजबूत और प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र में उनकी सक्रियता और लगातार जनसंपर्क के कारण उनका राजनीतिक कद भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
युवाओं में मजबूत पकड़
लालकुआं क्षेत्र में युवाओं के बीच हेमवती नंदन दुर्गापाल की अच्छी पैठ बताई जा रही है। युवा वर्ग उन्हें नई सोच और विकास की राजनीति का प्रतिनिधि मान रहा है। समर्थकों का कहना है कि नंदन दुर्गापाल युवाओं और आम जनता की समस्याओं को सुनने के साथ-साथ उनके समाधान के लिए भी प्रयासरत रहते हैं।
चुनाव से पहले तेज हुई सियासी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें लालकुआं सीट से उम्मीदवार बनाती है तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। क्षेत्र में लंबे समय से रुके हुए विकास कार्यों और जन समस्याओं के चलते लोगों की उम्मीदें एक बार फिर नए नेतृत्व की ओर टिकती दिखाई दे रही हैं।
समर्थकों का कहना है कि जिस तरह हरिश्चंद्र दुर्गापाल ने अपने कार्यकाल में लालकुआं को विकास की नई दिशा दी थी, उसी तरह हेमवती नंदन दुर्गापाल भी क्षेत्र की उम्मीदों पर खरा उतरने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनाव में जनता इस उम्मीद को कितना समर्थन देती है।
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