उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी ने अप्रैल के महीने में दिसंबर जैसी ठंड का अहसास करा दिया है। बदरीनाथ से लेकर हरिद्वार तक, कुदरत के इस बदले मिजाज से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
यहाँ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से मौसम की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
देहरादून/श्रीनगर (8 अप्रैल 2026): देवभूमि में बीती रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। तापमान में 8°C से 10°C तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोग गर्म कपड़े निकालने को मजबूर हो गए हैं।
1. गढ़वाल मंडल: बर्फबारी और ठिठुरन
-
चारधाम: बदरीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और गौरसो की चोटियों पर ताजा हिमपात हुआ है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर बर्फ की चादर बिछने से तीर्थयात्रियों और स्थानीय प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं।
-
मैदानी क्षेत्र: ऋषिकेश में सुबह 4 बजे से तेज वर्षा जारी है। कोटद्वार में तापमान 8 डिग्री तक गिर गया है, जबकि हरिद्वार में देर रात से हो रही बारिश ने सामान्य जनजीवन की रफ्तार रोक दी है।
-
श्रीनगर व टिहरी: श्रीनगर में लगातार बारिश से पारा गिर गया है, वहीं टिहरी जिला मुख्यालय में मंगलवार रात से बारिश का सिलसिला थमा नहीं है।
2. कुमाऊं मंडल: पिंडारी में बर्फ के फाहे
-
बागेश्वर: पिंडर घाटी और पिंडारी क्षेत्र में बर्फ की फुहारें गिरने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
-
पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा: पिथौरागढ़ में 3000 मीटर की ऊंचाई तक बर्फबारी का अनुमान है। अल्मोड़ा में न्यूनतम तापमान 6°C और काशीपुर में 12°C तक लुढ़क गया है।
-
नैनीताल व रामनगर: नैनीताल और रामनगर में रात भर हुई बारिश ने मौसम को बेहद ठंडा बना दिया है।
3. रुड़की: पेड़ गिरने से बिजली और इंटरनेट ठप
बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने रुड़की क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचाया है:
-
विद्युत आपूर्ति: बुग्गावाला बिजलीघर की लाइन पर बांस के पेड़ गिरने से शहर से देहात तक अंधेरा छाया है। धनौरी, रामनगर और झबरेड़ा में भी बिजली गुल है।
-
इंटरनेट संकट: जामुन रोड पर बड़ा पेड़ गिरने से कई इलाकों की इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गई हैं। बारिश के चलते मरम्मत कार्यों में बाधा आ रही है।
4. अन्नदाता पर दोहरी मार: फसलों को भारी नुकसान
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि (विशेषकर डोईवाला क्षेत्र) ने किसानों की साल भर की मेहनत संकट में डाल दी है:
-
गेहूं की फसल: जिन किसानों ने फसल काटकर सुखाने के लिए खेतों में छोड़ी थी, पानी भरने से वह खराब होने की कगार पर है। ओलों ने खड़ी फसल को भी नुकसान पहुँचाया है।
-
आम के बाग: आम की फसल पर पहले ही ‘चेपा रोग’ का हमला था। अब बारिश ने दवाओं का असर धो दिया है, जिससे बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
