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काशीपुर में उल्टी बह रही ‘एनएच की गंगा’, ठेकेदारों की मनमानी और अफसरों की चुप्पी से बढ़ा शहर में जलभराव का खतरा

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राजू अनेजा,काशीपुर। विकास के नाम पर काशीपुर में ऐसी इंजीनियरिंग कर दी गई है, जिसने आम लोगों के साथ-साथ तकनीकी जानकारों को भी हैरानी में डाल दिया है।

 

जी हां बात हो रही है काशीपुर-रामनगर रोड की जहां स्टेडियम चौराहे पर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के ठेकेदारों ने नाला ही उल्टी दिशा में बना दिया। हालात यह हैं कि पानी को बहना आगे था, लेकिन नाले का मुंह पीछे कर दिया गया है। सवाल यह है कि जब पानी ही आगे नहीं जाएगा तो शहर को जलभराव से कैसे बचाया जाएगा?
स्टेडियम चौराहे के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर के साथ दोनों ओर बनाए जा रहे नालों के लेवल में भारी अंतर सामने आया है। नाले की ढलान गलत दिशा में होने के कारण पानी की निकासी संभव ही नहीं रह गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनएच के ठेकेदारों ने बिना तकनीकी जांच के निर्माण कर दिया और अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांधकर काम को चलता रहने दिया।

निकासी की जगह बना दी दीवार

योजना के अनुसार इस नाले का पानी सरकारी अस्पताल के पास लक्ष्मीपुर माइनर से होते हुए ढेला नदी में छोड़ा जाना है, ताकि काशीपुर शहर और हाइवे पर जलभराव की समस्या न हो। लेकिन निर्माण में हुई गंभीर खामी के चलते नाला निकासी का साधन बनने के बजाय दीवार बनता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि बरसात में यह नाला पानी उगलने लगेगा और आसपास के इलाकों में जलभराव तय है।

 

 

सरकारी धन की बर्बादी का आरोप

 

शहरवासियों का आरोप है कि नाला निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी में बहाए जा रहे हैं। बिना लेवल जांच, बिना साइट निरीक्षण और बिना जवाबदेही के किया जा रहा यह काम भ्रष्टाचार की बू देता है। लोगों का कहना है कि अगर अभी सुधार नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में काशीपुर के कई इलाके तालाब में तब्दील हो सकते हैं।

 

जनता में रोष, जांच की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी अरोड़ा ने एनएच, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली बर्बादी है। दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर उनसे ही नुकसान की भरपाई कराई जानी चाहिए।

 

अधिकारियों की सफाई

एनएच के सब-डिविजनल ऑफिसर विनोद कुमार ने कहा कि यदि नाला निर्माण में लेवल या दिशा को लेकर कोई त्रुटि है तो इसकी जांच कराई जाएगी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार काम होना चाहिए। जांच में दोष सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, एनएच की इस ‘उल्टी इंजीनियरिंग’ ने काशीपुरवासियों की नींद उड़ा दी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब नाला ही उल्टा बहेगा तो शहर को डूबने से कौन बचाएगा?

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